मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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गुजरात: अंबाजी मंदिर के प्रसिद्ध 'मोहनथाल' प्रसाद को मिली जीआई टैग की मान्यता

गुजरात के प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर में माता को चढ़ाए जाने वाले पारंपरिक 'मोहनथाल' प्रसाद को अब एक विशेष भौगोलिक पहचान (GI) मिल गई है। इस जीआई टैग से न केवल प्रसाद के नाम को कानूनी संरक्षण मिलेगा, बल्कि…

गुजरात: अंबाजी मंदिर के प्रसिद्ध 'मोहनथाल' प्रसाद को मिली जीआई टैग की मान्यता
(फोटो: IANS)

गुजरात के प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर में माता को चढ़ाए जाने वाले पारंपरिक 'मोहनथाल' प्रसाद को अब एक विशेष भौगोलिक पहचान (GI) मिल गई है। इस जीआई टैग से न केवल प्रसाद के नाम को कानूनी संरक्षण मिलेगा, बल्कि इसे बनाने की सदियों पुरानी विधि और विरासत को भी सहेजने में मदद मिलेगी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मान्यता प्रसाद की प्रामाणिकता सुनिश्चित करेगी और इसके अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाएगी।

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यह प्रतिष्ठित दर्जा मिलने के बाद अंबाजी का मोहनथाल भी तिरुपति के लड्डू और पलानी के पंचामृतम जैसे प्रसिद्ध भारतीय धार्मिक प्रसादों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्हें जीआई टैग प्राप्त है। श्री अरासुरी अंबाजी माता देवस्थान ट्रस्ट को इसका आधिकारिक प्रमाण पत्र 1 अक्टूबर को जारी किया गया था, जिसे नवरात्रि के पहले दिन आयोजित एक समारोह में सौंपा गया।

प्रसाद की प्रामाणिकता और विरासत का संरक्षण

अंबाजी के चाचर चौक पर हुए इस कार्यक्रम में पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क के कंट्रोलर जनरल प्रो. डॉ. उन्नत पंडित ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ मोहनथाल की पहचान को ही नहीं, बल्कि मां जगदंबा में लाखों भक्तों की आस्था और इस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत को भी मान्यता देता है। उन्होंने कहा, “जीआई टैग से यह पक्का करने में मदद मिलेगी कि अंबाजी आने वाले भक्तों को असली मोहनथाल प्रसाद मिले।”

इस अवसर पर बनासकांठा के जिला कलेक्टर मिहिर पटेल और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। मंदिर के प्रशासक और अतिरिक्त कलेक्टर कौशिक मोदी ने इस मान्यता को हासिल करने के लिए ट्रस्ट द्वारा किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला।

जीआई उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल

प्रो. पंडित ने अहमदाबाद के एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई) की भूमिका की भी सराहना की, जिसने जीआई-टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष स्टोर शुरू किया है। इस स्टोर में देश के विभिन्न हिस्सों के पारंपरिक उत्पाद रखे गए हैं, जिससे उनकी पहचान बनी रहती है और बिक्री भी बढ़ती है। इस समारोह में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के प्रतिनिधियों, मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी हिस्सा लिया।

इनपुट: IANS

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