द्वारका में आकार ले रहा भव्य श्रीकृष्ण संग्रहालय, ₹92.70 करोड़ की लागत से संस्कृति और तकनीक का होगा संगम
गुजरात के द्वारका में एक महत्वाकांक्षी सांस्कृतिक परियोजना पर काम चल रहा है, जिसका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और संदेशों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करना है। समाचार एजेंसी IANS की एक…
गुजरात के द्वारका में एक महत्वाकांक्षी सांस्कृतिक परियोजना पर काम चल रहा है, जिसका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और संदेशों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करना है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 92.70 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह श्रीकृष्ण संग्रहालय द्वारकाधीश मंदिर से लगभग 1.6 किलोमीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है। इस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में विकसित हो रहा यह संग्रहालय भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और अत्याधुनिक तकनीक का अनूठा संगम होगा। इसका मुख्य लक्ष्य भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, उनके जीवन मूल्यों और श्रीमद्भगवद्गीता के शाश्वत संदेश को एक ही स्थान पर व्यवस्थित और आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करना है।
नौ गैलरी में दिखेगा कृष्ण का संपूर्ण जीवन
संग्रहालय की सबसे बड़ी खासियत इसकी नौ थीम-आधारित गैलरी होंगी। इनमें भगवान कृष्ण के जन्म से लेकर महाभारत में उनकी भूमिका तक के महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत किया जाएगा। इनमें उनकी बाल लीलाएं, गोकुल-वृंदावन के प्रसंग, गोवर्धन पर्वत धारण करना, कालिया नाग मर्दन, रासलीला, मथुरा गमन और कंस वध जैसी घटनाएं शामिल हैं। साथ ही, स्वर्णनगरी द्वारका की स्थापना को भी विशेष रूप से दर्शाया जाएगा। इन कहानियों को मूर्तियों, चित्रों, कलाकृतियों और प्रतिकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत करने की योजना है।
आधुनिक तकनीक और डिजिटल अनुभव
इस संग्रहालय को पारंपरिक रूप से अलग बनाने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। आगंतुकों को एक अनूठा अनुभव देने के लिए इमर्सिव ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों, इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले, 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग और मोशन सेंसर-आधारित अनुभव तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा, थीम-आधारित लाइटिंग, साउंडस्केप और डिजिटल स्टोरीटेलिंग के जरिए कृष्ण के जीवन प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से दिखाया जाएगा। इसका उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान से रोचक तरीके से जोड़ना है।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। संग्रहालय परिसर में विशेष लैंडस्केप क्षेत्र, कमल तालाब, लाइट एंड साउंड शो और एक एम्फीथिएटर जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। आगंतुकों की सुविधा के लिए डिजिटल सूचना प्रणाली, विजिटर डेस्क, दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं, कैफे और पार्किंग की व्यवस्था होगी। माना जा रहा है कि यह संग्रहालय द्वारका को एक प्रमुख धार्मिक स्थल के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और शैक्षणिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करेगा, जिससे परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार से जुड़े रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
इनपुट: IANS



