गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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काशी तमिल संगमम 5.0: तिरुक्कुरल की शिक्षाओं के साथ उत्तर और दक्षिण के सांस्कृतिक संबंध होंगे और गहरे

भारत के उत्तर और दक्षिण के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए 'काशी तमिल संगमम' अपने पांचवें संस्करण के साथ लौट रहा है। इस बार यह आयोजन तमिल भाषा के प्राचीन ग्रं…

काशी तमिल संगमम 5.0: तिरुक्कुरल की शिक्षाओं के साथ उत्तर और दक्षिण के सांस्कृतिक संबंध होंगे और गहरे
(फोटो: IANS)

भारत के उत्तर और दक्षिण के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए 'काशी तमिल संगमम' अपने पांचवें संस्करण के साथ लौट रहा है। इस बार यह आयोजन तमिल भाषा के प्राचीन ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' में समाहित नैतिक मूल्यों पर केंद्रित होगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 22 अक्टूबर को इस कार्यक्रम के लिए पंजीकरण पोर्टल का शुभारंभ किया।

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यह आयोजन 28 नवंबर से 12 दिसंबर 2026 तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं और विद्यार्थियों को 'तिरुक्कुरल' के जीवन-मूल्यों से परिचित कराना है। इस प्रयास के तहत विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी और कई भाषाओं में अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि ग्रंथ की शिक्षाएँ केवल पढ़ने तक सीमित न रहकर लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन सकें।

प्रतिभागियों की यात्रा और कार्यक्रम

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, काशी तमिल संगमम 5.0 में तमिलनाडु से लगभग 1,400 प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। इन प्रतिभागियों को 200-200 लोगों के सात समूहों में बाँटा जाएगा। प्रत्येक समूह आठ दिनों की यात्रा पर निकलेगा, जिसमें चार दिन यात्रा और चार दिन वाराणसी, प्रयागराज व अयोध्या में भ्रमण और निर्धारित कार्यक्रमों के लिए होंगे। इन स्थानों पर उनके लिए सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी।

इस बार संगमम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों, पेशेवरों, किसानों, कलाकारों, महिलाओं और आध्यात्मिक विद्वानों को एक मंच पर लाने की योजना है, जिसमें युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है।

राष्ट्रव्यापी भागीदारी और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत'

पोर्टल के शुभारंभ पर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि काशी और रामेश्वरम की यात्रा की प्राचीन परंपरा उत्तर और दक्षिण के गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि काशी तमिल संगमम 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस आयोजन को व्यापक बनाने के लिए देश भर के 1,000 उच्च शिक्षण संस्थानों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँगे। इन कार्यक्रमों का लक्ष्य विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के बीच तिरुक्कुरल की शिक्षाओं की समझ विकसित करना है, जिसमें ग्रंथ का व्यवस्थित अध्ययन और शोध भी शामिल होगा।

उल्लेखनीय है कि काशी तमिल संगमम का पहला संस्करण 2022 में हुआ था। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में आईआईटी मद्रास, काशी हिंदू विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश सरकार समेत कई अन्य विभाग सहयोग करते हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

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