भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी: प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली में समापन समारोह में देंगे श्रद्धांजलि
भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी के अवसर पर साल भर चले कार्यक्रमों का समापन नई दिल्ली में एक भव्य समारोह के साथ होगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल…
भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी के अवसर पर साल भर चले कार्यक्रमों का समापन नई दिल्ली में एक भव्य समारोह के साथ होगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे और 'ब्रह्मपुत्र के गायक' के रूप में प्रसिद्ध इस महान कलाकार को श्रद्धांजलि देंगे। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने दी है।
यह भव्य आयोजन 29 नवंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी पहली बार दिए जाने वाले 'भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका पुरस्कार' को भी प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री सरमा ने शुक्रवार को दिसपुर में लोक सेवा भवन में शताब्दी समारोह समिति की एक बैठक में कार्यक्रम की अंतिम तैयारियों का जायजा लिया। इस आयोजन में देशभर से लगभग 5,000 प्रशंसकों, गणमान्य अतिथियों और कला-संस्कृति से जुड़े लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
कलाकारों की संगीतमय श्रद्धांजलि
इस अवसर पर भूपेन हजारिका की समृद्ध संगीत विरासत को याद करते हुए एक विशेष संगीतमय श्रद्धांजलि का भी आयोजन किया गया है। इसमें गायिका कविता कृष्णमूर्ति, गायक शंकर महादेवन और श्रेया घोषाल समेत कई जाने-माने कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संगीत और संस्कृति में हजारिका के योगदान को याद करेंगे।
'हजारिका का संदेश पीढ़ियों तक पहुंचे'
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि भूपेन हजारिका की कलात्मक विरासत, उनके गीत और उनका सार्वभौमिक संदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक लोगों तक पहुंचे। उन्होंने जोर दिया कि मानवता, सद्भाव और विश्व बंधुत्व का उनका संदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री ने समिति के सदस्यों से सुझाव भी मांगे ताकि यह आयोजन महान कलाकार को एक सच्ची श्रद्धांजलि बन सके।
आयोजकों के अनुसार, यह समापन समारोह भूपेन हजारिका के संगीत, साहित्य और संस्कृति पर पड़े स्थायी प्रभाव का उत्सव होगा। भूपेन हजारिका, जिन्हें 'बार्ड ऑफ द ब्रह्मपुत्र' के नाम से जाना जाता था, भारत के सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक व्यक्तित्वों में से एक हैं। उनकी रचनाएं असम की सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ी थीं, लेकिन उन्होंने भाषा और भूगोल की सीमाओं को पार कर पूरे देश में अपनी पहचान बनाई।
इनपुट: IANS



