तेलंगाना में बाढ़ का संकट: भद्राचलम में गोदावरी खतरे के निशान से ऊपर, 38 लोग बचाए गए
तेलंगाना में पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के बाद कई नदियां उफान पर हैं, जिससे राज्य के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, भद्राद्रि कोठागुडेम…
तेलंगाना में पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के बाद कई नदियां उफान पर हैं, जिससे राज्य के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, भद्राद्रि कोठागुडेम जिले में भद्राचलम के पास गोदावरी नदी शुक्रवार को खतरे के दूसरे निशान 48 फीट को पार कर गई, जिसके बाद प्रशासन ने निचले इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया है।
शुक्रवार सुबह ही नदी का जलस्तर पहले खतरे के निशान 43 फीट को पार कर गया था। केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों का अनुमान है कि ऊपरी इलाकों से लगातार पानी आने के कारण जलस्तर और बढ़ सकता है। नदी में खतरे का तीसरा निशान 53 फीट पर है। भद्राचलम में गोदावरी का प्रवाह 11.44 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया।
बचाव कार्य और प्रमुख क्षेत्रों पर असर
बाढ़ के बीच एक बड़ी बचाव कार्रवाई में, भद्राद्रि कोठागुडेम जिले के चेरला के पास प्रशासन ने रेत के टीले पर फंसे 38 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। ये लोग ट्रकों में रेत भरने गए थे, तभी अचानक बाढ़ का पानी आ गया। जिला प्रशासन ने नावों की मदद से ट्रक ड्राइवरों, क्लीनरों और मशीन ऑपरेटरों को बचाया।
बाढ़ के पानी से भद्राचलम के प्रसिद्ध स्री सीता रामचंद्रस्वामी मंदिर परिसर का अन्नदानम सत्रम क्षेत्र भी जलमग्न हो गया। बताया गया कि बैकवॉटर को नदी में वापस पंप करने वाला मोटर खराब हो गया, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई।
राज्य के अन्य हिस्सों में भी गंभीर स्थिति
बाढ़ का असर सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है। मुलुगु जिले में वेंकटापुरम और चेरला के बीच सड़क संपर्क टूट गया है और कई गांव पानी में डूब गए हैं। हालांकि, जब अधिकारियों ने लोगों को राहत शिविरों में ले जाने की कोशिश की, तो उन्होंने इसका विरोध किया। ग्रामीणों ने हर साल की इस समस्या के स्थायी समाधान के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर घर देने की मांग की।
उत्तरी तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में भी पेंगंगा और प्रणहिता जैसी नदियां उफान पर हैं, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं, मंचेरियल जिले में सिंगरेनी कोलियरीज की खदानों में पानी भरने से कोयला उत्पादन ठप हो गया, जिससे करीब 18 करोड़ रुपये का उत्पादन घाटा होने का अनुमान है। कृष्णा नदी पर बने जुराला प्रोजेक्ट के भी 24 गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।
इनपुट: IANS



