NDA में आरक्षण पर तकरार: जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान पर लगाया 'असंवैधानिक काम' करने का आरोप
केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) आरक्षण में उप-वर्गीकरण को लेकर मतभेद गहरा गए हैं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने रविवार को अपने ही…
केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) आरक्षण में उप-वर्गीकरण को लेकर मतभेद गहरा गए हैं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने रविवार को अपने ही सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान पर 'असंवैधानिक काम' करने का आरोप लगाया है। यह विवाद 'कोटे के अंदर कोटा' की मांग को लेकर है, जिसका पासवान विरोध कर रहे हैं।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा मामला चिराग पासवान के उस बयान के बाद शुरू हुआ जिसमें उन्होंने SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग का विरोध किया था। पासवान ने कहा था कि ऐसी मांग करने वालों को पहले अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया था कि आरक्षण का आधार आर्थिक नहीं, बल्कि सदियों से चला आ रहा सामाजिक भेदभाव और छुआछूत है।
क्या है मांझी और पासवान का पक्ष?
चिराग पासवान के बयान के जवाब में, जीतन राम मांझी ने IANS से कहा, "चिराग पासवान जो कुछ भी कर रहे हैं, वह असंवैधानिक है।" उन्होंने अपनी मांग का आधार बताते हुए कहा कि 'कोटे के अंदर कोटा' का समर्थन सुप्रीम कोर्ट भी कर चुका है। मांझी के अनुसार, शीर्ष अदालत ने बहुमत से फैसला देते हुए राज्यों को इसे लागू करने का निर्देश दिया है और देश के लगभग छह राज्य इसे पहले ही लागू कर चुके हैं।
मांझी ने सवाल उठाया, "तो जो चीज पहले ही लागू हो चुकी है, उसकी मांग करने के लिए इस्तीफा देने की क्या बात है? जो संविधान के खिलाफ बोल रहा है, उसे इस्तीफा देना चाहिए।"
वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान का मानना है कि आरक्षण को आर्थिक दृष्टिकोण से देखना इसके मूल उद्देश्य को कमजोर करेगा। हाजीपुर से सांसद पासवान ने किसी भी तरह के बदलाव से पहले एक विस्तृत संवैधानिक और संसदीय बहस की वकालत की है।
क्यों उठी 'कोटे में कोटा' की मांग?
दरअसल, जीतन राम मांझी और उनके बेटे व बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन SC/ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि आरक्षण का लाभ सभी दलित और आदिवासी समुदायों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाया है। संतोष सुमन ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग आरक्षण को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सबसे वंचित समूहों को भी उनका हक मिले।
इस मुद्दे पर चिराग पासवान ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा था। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से सवाल किया कि अगर इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद भी सामाजिक भेदभाव कायम है, तो इसके लिए कांग्रेस को भी जवाब देना होगा।
इनपुट: IANS



