गुरूवार, 30 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
मध्यप्रदेश

ग्वालियर बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब, 3500 करोड़ के निवेश से बदल जाएगी तस्वीर

भारत को वैश्विक दूरसंचार विनिर्माण के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मध्य प्रदेश का ग्वालियर शहर देश के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) का केंद्र बनने…

ग्वालियर बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब, 3500 करोड़ के निवेश से बदल जाएगी तस्वीर
(फोटो: IANS)

भारत को वैश्विक दूरसंचार विनिर्माण के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मध्य प्रदेश का ग्वालियर शहर देश के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) का केंद्र बनने जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय संचार मंत्रालय और मध्य प्रदेश सरकार के बीच एक अहम समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

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इस मौके पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मौजूद थे। सिंधिया ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत', 'मेक इन इंडिया', और 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण को गति देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यह भारत को केवल टेलीकॉम सेवा प्रदाता से आगे बढ़कर दूरसंचार उपकरण बनाने वाला एक प्रमुख राष्ट्र बनाएगा।

परियोजना का स्वरुप और निवेश

यह विशेष ज़ोन ग्वालियर में लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जो अत्याधुनिक 'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल पर आधारित होगा। केंद्र सरकार ने इसके पहले चरण में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 500 करोड़ रुपए की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है। इस परियोजना से राज्य में करीब 3,500 करोड़ रुपए का कुल निवेश आने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के मुताबिक, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, एचएफसीएल (HFCL) और तेजस नेटवर्क्स जैसी बड़ी कंपनियां इस परियोजना में निवेश के लिए आगे आई हैं। यह परिसर मोबाइल फोन, नेटवर्क उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स, और सेमीकंडक्टर जैसे उत्पादों के रिसर्च, डिजाइन, विकास, परीक्षण और निर्माण का एक एकीकृत केंद्र होगा।

रोजगार और स्थानीय विकास

इस मेगा-प्रोजेक्ट से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 14,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, "इससे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के युवाओं को अपने ही प्रदेश में उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर मिलेंगे और यह इलाका हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग तथा इनोवेशन का प्रमुख केंद्र बन जाएगा।"

प्रबंधन और क्रियान्वयन

परियोजना के प्रभावी प्रबंधन के लिए एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा। इस SPV में मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जो निवेश और संचालन के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा प्रदान करेगा। सिंधिया ने इसे सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना को साकार कर रही हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social मध्य प्रदेश डेस्क

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