बंगाल में नाबालिग मां बनने पर पति पर लगेगा पॉक्सो एक्ट, सरकार खुद दर्ज कराएगी केस
पश्चिम बंगाल में बाल विवाह और किशोरावस्था में गर्भधारण जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में अगर कोई भी लड़की 18 साल की उम्र से पहले मां बनती है…
पश्चिम बंगाल में बाल विवाह और किशोरावस्था में गर्भधारण जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में अगर कोई भी लड़की 18 साल की उम्र से पहले मां बनती है, तो उसके पति के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को घोषणा की कि ऐसे मामलों में राज्य सरकार स्वतः संज्ञान लेकर कानूनी कार्रवाई करेगी।
मुख्यमंत्री ने इस समस्या के लिए पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, "पश्चिम बंगाल अब बाल विवाह और 18 वर्ष से कम आयु में मातृत्व के मामलों के लिए बदनाम हो गया है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अब इस सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कानूनी कार्रवाई का दायरा
इस नए नियम के तहत न केवल पति, बल्कि इस प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। नाबालिगों का विवाह कराने वाले पुजारी या काजी के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। इसके साथ ही, संबंधित अभिभावकों को भी कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को 20 साल तक की अधिकतम सजा हो सकती है और उसे सरकारी योजनाओं व सामाजिक कल्याण के लाभों से भी वंचित कर दिया जाएगा।
राज्य में चिंताजनक आंकड़े
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों का हवाला देते हुए स्थिति की भयावहता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2026 के बीच, पश्चिम बंगाल में लगभग 60,000 नाबालिग लड़कियां मां बनीं।
इस मामले में मुर्शिदाबाद जिला सबसे आगे रहा, जहां इस अवधि में 12,847 नाबालिग लड़कियों ने बच्चों को जन्म दिया। इसके बाद दक्षिण 24 परगना जिले का स्थान है, जहां 4,178 लड़कियां 18 वर्ष की आयु से पहले मां बन गईं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के मामले इतने ज्यादा हैं कि सभी दोषियों को रखने के लिए राज्य में पर्याप्त जेलें भी नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार सख्त कदम उठाएगी।
जागरूकता और भविष्य की योजना
अधिकारी ने कहा कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए कानूनी कार्रवाई और जागरूकता अभियान, दोनों स्तरों पर काम करेगी। उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में भी बाल विवाह को रोकने के लिए प्रावधान हैं। उन्होंने कहा, "हमें इस सामाजिक बुराई को खत्म करना है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बड़ा अभियान चलाया जाएगा।"
इनपुट: IANS



