योगेश गौड़ा हत्याकांड: पूर्व कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत, दोषसिद्धि भी निलंबित
भाजपा नेता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पूर्व कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को बड़ी राहत दी है। शुक्रवार को दिए एक आदेश में, अदालत ने न केवल कुलकर्णी को अंतरिम जमानत दी…
भाजपा नेता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पूर्व कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को बड़ी राहत दी है। शुक्रवार को दिए एक आदेश में, अदालत ने न केवल कुलकर्णी को अंतरिम जमानत दी, बल्कि उनकी दोषसिद्धि को भी निलंबित कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, निचली अदालत ने इसी महीने उन्हें इस चर्चित मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
उच्च न्यायालय का यह फैसला जस्टिस मोहम्मद नवाज और जस्टिस जी. बसवराज की खंडपीठ ने सुनाया। पीठ ने विनय कुलकर्णी द्वारा अपनी सजा के खिलाफ दायर की गई आपराधिक अपील पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने 9 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
जमानत की शर्तें और राजनीतिक असर
अंतरिम राहत देते हुए अदालत ने कुलकर्णी पर कई शर्तें भी लगाई हैं। उन्हें 5 लाख रुपये का जमानत बांड जमा करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, अदालत से पूर्व अनुमति लिए बिना वे विदेश यात्रा नहीं कर सकते। हालांकि, हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा धारवाड़ जिले में उनके प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को जारी नहीं रखा है।
फिलहाल बेंगलुरु की केंद्रीय जेल में बंद कुलकर्णी धारवाड़ ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दोषसिद्धि पर रोक लगने के इस फैसले के महत्वपूर्ण राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। इससे कुलकर्णी के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई के अधीन अपनी विधायक की सदस्यता का दावा करने का रास्ता खुल सकता है।
क्या था योगेश गौड़ा हत्याकांड?
यह मामला 15 जून, 2016 का है, जब धारवाड़ के एक जिम में भाजपा के जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या कर दी गई थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने की थी। सीबीआई ने अपनी जांच में एक बड़ी राजनीतिक साजिश का पर्दाफाश किया था।
इस मामले में, बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने 17 अप्रैल, 2024 को विनय कुलकर्णी और 16 अन्य सह-आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सीबीआई ने कहा था कि सबूत नष्ट करने और दूसरों को फंसाने में कुलकर्णी, उनके चाचा और एक पुलिस इंस्पेक्टर की भी भूमिका थी। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई अब हाईकोर्ट के इस अंतरिम जमानत और दोषसिद्धि पर रोक के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है।
इनपुट: IANS



