पंजाब: सरकार के 'दिवाली तोहफे' से नाराज़ कर्मचारी, 13 नवंबर से महीने भर के आंदोलन का ऐलान
पंजाब में भगवंत मान सरकार द्वारा महंगाई भत्ते (DA) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के ऐलान को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने सिरे से खारिज कर दिया है। इसे 'नाकाफी' बताते हुए कर्मचारी यूनियनों ने 13…
पंजाब में भगवंत मान सरकार द्वारा महंगाई भत्ते (DA) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के ऐलान को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने सिरे से खारिज कर दिया है। इसे 'नाकाफी' बताते हुए कर्मचारी यूनियनों ने 13 नवंबर से एक महीने लंबे राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले से सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।
यह निर्णय कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों की संयुक्त समन्वय समिति ने लिया है, जो प्रदेश के करीब चार लाख सरकारी कर्मचारियों और साढ़े तीन लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करती है। मुख्यमंत्री मान ने बुधवार को डीए में 3% की वृद्धि को दिवाली का तोहफा बताया था, जिससे कुल डीए दर 53% हो गई है। सरकार के अनुसार, यह बढ़ी हुई राशि दिसंबर में मिलने वाले नवंबर के वेतन और पेंशन में जुड़कर आएगी।
क्या हैं आंदोलन की योजनाएं?
कर्मचारी यूनियनों ने विरोध प्रदर्शन की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। आंदोलन की शुरुआत 13 नवंबर को संगरूर शहर में अनिश्चितकालीन धरने से होगी, जो 19 नवंबर तक चलेगा। दिलचस्प बात यह है कि यूनियनों ने विरोध का केंद्र चंडीगढ़ से बदलकर संगरूर कर दिया है।
इसके बाद, 1 से 5 दिसंबर तक प्रदर्शनकारी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी (आप) के सभी 91 विधायकों के आवासों के बाहर प्रदर्शन करेंगे और सत्ताधारी पार्टी के पुतले जलाएंगे। 6 दिसंबर को, इन पुतलों की राख को लुधियाना के बुड्ढा नाला में विसर्जित करने की योजना है। इस महीने भर के आंदोलन का समापन 13 दिसंबर को शंभू से अमृतसर तक एक मानव श्रृंखला बनाकर किया जाएगा।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
यूनियन नेताओं सुखचैन खेरा और गुरनाम सिंह विर्क के अनुसार, सरकार की हालिया घोषणा उनकी मुख्य मांगों को पूरा करने में विफल रही है। उनका कहना है कि जब तक सरकार अपने वादे पूरे नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली।
- बचे हुए 10 प्रतिशत डीए को जारी करना और डीए के बकाये का भुगतान।
- छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू करना।
- पुराने वेतनमानों और भत्तों को फिर से बहाल करना।
यूनियनों का तर्क है कि सिर्फ डीए की दर बढ़ाने से बकाया राशि और अन्य लंबित मुद्दों का समाधान नहीं होता। उन्होंने डीए किस्तों और अन्य वित्तीय लाभों को लेकर सरकार के दावों को भी चुनौती दी है। यह टकराव ऐसे समय में बढ़ा है जब सरकार का दावा है कि उसने पिछले दो महीनों में डीए में कुल 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।
इनपुट: IANS



