फ्लोरिडा से अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचीं भारतीय मूल की पिया डांडिया, जयपुर से है गहरा नाता
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में भारतीय मूल की पिया डांडिया ने फ्लोरिडा से जीत हासिल कर एक अहम उपलब्धि दर्ज की है। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार के तौर पर उन्होंने अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में…
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में भारतीय मूल की पिया डांडिया ने फ्लोरिडा से जीत हासिल कर एक अहम उपलब्धि दर्ज की है। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार के तौर पर उन्होंने अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अपनी जगह बनाई है, लेकिन उनकी इस कामयाबी की गूंज हजारों मील दूर भारत के जयपुर शहर में भी सुनाई दे रही है, जहां उनके परिवार की जड़ें हैं।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ा। उन्होंने अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी केसी असकर को हराया। पिया को 51.89 प्रतिशत वोट मिले, जबकि असकर को 48.11 प्रतिशत मतों से संतोष करना पड़ा। इस जीत के साथ ही वे अमेरिकी राजनीति में एक उभरते हुए चेहरे के तौर पर सामने आई हैं।
जयपुर से जुड़ाव और पारिवारिक पृष्ठभूमि
पिया डांडिया का जन्म और पालन-पोषण भले ही अमेरिका में हुआ हो, लेकिन उनका जयपुर से गहरा रिश्ता है। उनके माता-पिता 1980 में जयपुर से अमेरिका चले गए थे। उनके पिता रोहित डांडिया एक डॉक्टर हैं, जिन्होंने जयपुर के प्रतिष्ठित सवाई मान सिंह (एसएमएस) मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी। पिया बचपन में स्कूल की छुट्टियों के दौरान अक्सर अपने रिश्तेदारों से मिलने जयपुर आया करती थीं और यह सिलसिला कॉलेज के दिनों तक जारी रहा।
शिक्षा और जनसेवा का सफर
पिया की मां शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी हैं और उन्होंने फ्लोरिडा के जुपिटर में एक मोंटेसरी स्कूल की स्थापना की थी। पिया ने अपनी शुरुआती शिक्षा इसी स्कूल से प्राप्त की। वंचित बच्चों के लिए शिक्षा के अवसर मुहैया कराना उनके करियर का मुख्य केंद्र रहा है। महज 28 साल की उम्र में उन्होंने न्यूयॉर्क के हार्लेम में कम आय वाले परिवारों के बच्चों के लिए एक हाई स्कूल की स्थापना की और उसकी संस्थापक प्रिंसिपल बनीं। इस संस्थान से पढ़े कई छात्रों ने बाद में प्रतिष्ठित कॉलेजों में दाखिला लिया।
अपने पेशेवर जीवन में पिया डांडिया ने व्हाइट हाउस फेलो के तौर पर भी काम किया है, जिससे उन्हें अमेरिकी प्रशासन और नीति-निर्माण की प्रक्रिया को करीब से समझने का मौका मिला। इसके अलावा, उन्होंने टेक्नोलॉजी कंपनी एप्पल में भी काम किया है। शिक्षा, कॉर्पोरेट जगत और जनसेवा के विविध अनुभवों के साथ अब वह अमेरिकी कांग्रेस में एक नई पारी की शुरुआत कर रही हैं।
इनपुट: IANS



