पंजाब में पराली संकट: 2300 से ज्यादा मामले दर्ज, प्रशासन ने लगाया ₹40 लाख का जुर्माना
पंजाब में धान की कटाई लगभग पूरी होने के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4 नवंबर तक…
पंजाब में धान की कटाई लगभग पूरी होने के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4 नवंबर तक राज्य भर में पराली जलाने के 2,347 मामले सामने आ चुके हैं। इन पर कार्रवाई करते हुए पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) ने कुल 40.37 लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है।
प्रशासनिक कार्रवाई के तहत अब तक लगाए गए जुर्माने में से 23.05 लाख रुपये की वसूली भी कर ली गई है। PPCB के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 1,942 खेतों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 868 जगहों पर आग लगाए जाने की पुष्टि हुई। इसके आधार पर 801 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है। कानूनी कार्रवाई को और सख्त करते हुए विभिन्न जिलों में 647 एफआईआर भी दर्ज की गई हैं।
सबसे ज़्यादा प्रभावित जिले
रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि कुछ जिलों में पराली जलाने की समस्या विशेष रूप से गंभीर है। तरनतारन जिला 558 मामलों के साथ इस सूची में सबसे ऊपर है। इसके बाद फिरोजपुर में 316, अमृतसर में 207, बठिंडा में 167 और संगरूर में 163 मामले दर्ज किए गए हैं। पटियाला जिले में भी 110 घटनाएं सामने आई हैं, जहां 80 हजार रुपये के जुर्माने में से 35 हजार रुपये वसूले जा चुके हैं।
प्रशासन की बहुस्तरीय कार्रवाई
जुर्माने और एफआईआर के अलावा, प्रशासन अन्य तरीकों से भी लगाम कसने की कोशिश कर रहा है। अब तक 723 मामलों में संबंधित किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' दर्ज की गई है, जो उन्हें भविष्य में सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर सकती है। इसके अलावा, अधिकारियों ने 689 चेतावनी नोटिस भी जारी किए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य में 32.87 लाख हेक्टेयर धान क्षेत्र में से 85.10 प्रतिशत की कटाई पूरी होने के बाद भी खेतों में आग लगाने की घटनाएं जारी हैं।
इनपुट: IANS



