शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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कश्मीर में लश्कर की नई चाल: नागरिकों पर हमले के लिए पुरानी रणनीति की वापसी, पिस्तौल और नए रंगरूटों पर ज़ोर

जम्मू-कश्मीर में 10 दिनों के भीतर दो आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की बदली हुई रणनीति पर नज़र रख रही हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर अब कश्मीर में…

कश्मीर में लश्कर की नई चाल: नागरिकों पर हमले के लिए पुरानी रणनीति की वापसी, पिस्तौल और नए रंगरूटों पर ज़ोर
(फोटो: IANS)

जम्मू-कश्मीर में 10 दिनों के भीतर दो आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की बदली हुई रणनीति पर नज़र रख रही हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर अब कश्मीर में आम नागरिकों को निशाना बनाने के लिए अपने सहयोगी संगठनों का इस्तेमाल करने की अपनी पुरानी रणनीति पर लौट रहा है। इसका मकसद घाटी में डर का माहौल पैदा करना और अपनी मौजूदगी को फिर से प्रासंगिक बनाना है।

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एजेंसियों का मानना है कि अनंतनाग और कुलगाम में हाल में हुए हमले लश्कर के सहयोगी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' की ही साजिश हैं। इन हमलों से यह साफ़ संकेत मिलता है कि आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर में अपने अभियानों को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा है। ध्यान भटकाने के लिए एक नए नाम 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' का भी इस्तेमाल किया गया, जिसे जांचकर्ताओं ने लश्कर की एक चाल बताया है।

हमलों का बदला तरीका और नए निशाने

अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में एक स्पष्ट पैटर्न दिखाई देता है। अब निशाना वे आम नागरिक हैं, जहां सुरक्षा व्यवस्था बहुत कड़ी नहीं है। इनमें कश्मीरी पंडित, अल्पसंख्यक और घाटी में काम करने वाले प्रवासी मजदूर शामिल हैं। कुलगाम में प्रवासी श्रमिकों पर हुआ हमला लश्कर के पुराने तौर-तरीकों की याद दिलाता है, जिसका उद्देश्य गैर-स्थानीय लोगों में भय पैदा कर उन्हें घाटी छोड़ने पर मजबूर करना था।

लश्कर ने अपनी रणनीति में यह बदलाव इसलिए किया है क्योंकि आतंकी समूह संवेदनशील प्रतिष्ठानों और सेना के शिविरों में घुसपैठ करने में असमर्थ हैं। एक अधिकारी ने बताया कि वे नियमित अंतराल पर छोटे-मोटे हमले करके बड़ा प्रभाव पैदा करना चाहते हैं।

पिस्तौल और 'क्लीन-रिकॉर्ड' रंगरूट

इस नई रणनीति के तहत लश्कर ने अपने सदस्यों को एके-47 जैसे बड़े हथियारों की जगह पिस्तौल इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। पिस्तौल को आसानी से छिपाया जा सकता है और इस पर ज्यादा ध्यान भी नहीं जाता। इसके अलावा, खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, संगठन अब ऐसे लोगों की भर्ती कर रहा है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। इन नए रंगरूटों का इस्तेमाल सिर्फ एक हमले के लिए किया जाएगा, जिसके बाद वे गायब हो जाएंगे। इससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसे तत्वों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाएगा।

एक लश्कर सदस्य, लतीफ, की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जो पहले मारे जा चुके कमांडर जाकिर गनई के साथ काम करता था। अधिकारियों का मानना है कि लतीफ दक्षिण कश्मीर में 'हिट एंड रन' यानी अचानक हमला करके भाग जाने की तर्ज पर कम तीव्रता वाले हमले करने की योजना बना रहा है। इन हमलों से लश्कर अपनी स्थिति मजबूत करने और भर्ती अभियान को बढ़ावा देने की उम्मीद कर रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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