बुधवार, 23 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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विकसित भारत 2047: निर्मला सीतारमण ने प्रवासी भारतीयों से मांगा समर्थन, राजकोषीय अनुशासन पर दिया जोर

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा है कि 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य अब केवल 20 वर्ष दूर है और इसे हासिल करने के लिए जारी सुधारों को और…

विकसित भारत 2047: निर्मला सीतारमण ने प्रवासी भारतीयों से मांगा समर्थन, राजकोषीय अनुशासन पर दिया जोर
(फोटो: IANS)

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा है कि 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य अब केवल 20 वर्ष दूर है और इसे हासिल करने के लिए जारी सुधारों को और अधिक समर्थन की आवश्यकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने शिकागो में भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही।

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वित्त मंत्री ने विशेष रूप से तीन क्षेत्रों में सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हमें प्रतिभाशाली और व्यापक अनुभव रखने वाले लोगों से अधिक समर्थन की जरूरत है।" इसके साथ ही उन्होंने देश को आगे बढ़ाने वाले नए विचारों और पूंजी के रूप में भी समर्थन को देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।

सरकार का वित्तीय प्रबंधन और लक्ष्य

निर्मला सीतारमण ने सरकार की राजकोषीय नीतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 2030 तक कर्ज को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 50 प्रतिशत के स्तर तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और सरकार इसी दिशा में काम कर रही है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं का कर्ज उनकी जीडीपी के 200 प्रतिशत से भी अधिक है।

उन्होंने कहा, "हमने राजकोषीय घाटे को लेकर भी राजकोषीय अनुशासन का एक रास्ता तय किया है। हमने तय लक्ष्य के अनुरूप प्रगति की है। 2025-26 तक जिस अंतिम लक्ष्य को हासिल करना था, हमने उसे हासिल कर लिया है।" वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वित्तीय समझ की प्रशंसा करते हुए कहा कि दुनिया ने इसे गुजरात के मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री के रूप में देखा है।

चुनौतियों के बीच आर्थिक स्थिरता

वित्त मंत्री के अनुसार, भारत की क्रेडिट रेटिंग में सुधार नियमों को दरकिनार करके या सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी संसाधनों को रोककर नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के उचित प्रबंधन के जरिए हो रहा है। उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने मुश्किल समय में भी अपने नागरिकों को सुरक्षित रखा।

उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जब कच्चा तेल, एलपीजी और उर्वरक जैसी चीजों की वैश्विक आपूर्ति में कमी आई, तब भारत में उर्वरक की कमी महसूस नहीं हुई। सरकार ने एक फंड के जरिए शिपिंग कंपनियों को जोखिम प्रीमियम चुकाने में मदद की, जिससे भारतीय किसानों, परिवारों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को नुकसान नहीं उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि इन अनिश्चितताओं के बीच कई देशों की आर्थिक गणनाएं गड़बड़ा गईं, लेकिन भारत इस चुनौतीपूर्ण माहौल से निपटने में सफल रहा।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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