‘मन की बात’ में PM मोदी ने किया ज़िक्र, अब मालदीव तक पहुँचा कलबुर्गी की जीआई-टैग वाली तुअर दाल का स्वाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में मिली सराहना के बाद कर्नाटक के कलबुर्गी की मशहूर तुअर दाल अब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपनी जगह बना रही है। इस दाल को अब मालदीव में निर्या…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में मिली सराहना के बाद कर्नाटक के कलबुर्गी की मशहूर तुअर दाल अब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपनी जगह बना रही है। इस दाल को अब मालदीव में निर्यात किया जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादकों और कारोबारियों में भविष्य को लेकर खासा उत्साह है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने इसे स्थानीय उत्पादों के वैश्विक मंच तक पहुँचने का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।
कलबुर्गी की इस दाल को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication - GI) टैग भी हासिल है, जो इसकी खास पहचान और गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। स्थानीय लोग इसे 'तोगरी खानाजा' यानी तुअर का खजाना भी कहते हैं। इस क्षेत्र की ज़मीन में चूना पत्थर की मौजूदगी को इसकी अनूठी गुणवत्ता का कारण माना जाता है।
स्वाद और पोषण का खजाना
यह दाल सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि पोषण के मामले में भी काफी आगे है। दाल मिल एसोसिएशन के संचालक प्रतीश तापड़िया ने बताया कि जीआई टैग (संख्या 353) वाली इस दाल में पोटेशियम और कैल्शियम की मात्रा बाज़ार में मिलने वाली सामान्य तुअर दाल से ज़्यादा होती है। यह न सिर्फ स्वाद में बेहतर है, बल्कि शरीर को ऊर्जा देने में भी सहायक मानी जाती है।
पोषण संबंधी आंकड़े (प्रति 100 ग्राम):
- प्रोटीन: 22.30 ग्राम (18 से 23 प्रतिशत)
- कार्बोहाइड्रेट: 57.60 ग्राम
- वसा: 1.70 ग्राम
- खनिज: 3.50 ग्राम
- कैल्शियम: 73 मिलीग्राम
- ऊर्जा: 335 किलो कैलोरी
कारोबारियों की उम्मीदें और मांग
कलबुर्गी, बीदर, यादगीर और विजयपुरा जैसे ज़िलों में तुअर दाल की खेती देश की दाल ज़रूरतों को पूरा करने में अहम योगदान देती है। कारोबारियों का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा उल्लेख किए जाने और मालदीव को निर्यात शुरू होने से दाल के व्यापार को नई ऊँचाइयाँ मिल सकती हैं। प्रतीश तापड़िया के अनुसार, कई परिवार पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़े हैं और अगर निर्यात के बेहतर अवसर मिलते हैं तो कारोबार काफी बढ़ सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से तुअर दाल उद्योग को 'कृषि आधारित उद्योग' का दर्जा देने की भी मांग की। उनका कहना है कि इस कदम से किसानों और दाल मिल संचालकों, दोनों को फायदा होगा। कारोबारियों ने विदेशों से दाल के आयात को नियंत्रित करने और देश के किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाली दाल उगाने के लिए प्रोत्साहित करने की भी ज़रूरत पर ज़ोर दिया है।
इनपुट: IANS



