जामिया मिल्लिया इस्लामिया: मांगें मानने के बावजूद प्रदर्शन जारी, बुद्धिजीवियों ने संवाद पर ज़ोर दिया
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में तीन मांगें मान लिए जाने के बाद भी छात्रों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार शाम को भी छात्रों ने परिसर के अंदर विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाज़ी की। समाचार…
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में तीन मांगें मान लिए जाने के बाद भी छात्रों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार शाम को भी छात्रों ने परिसर के अंदर विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाज़ी की। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। इस बीच, जामिया में विवादित पोस्टर और कांग्रेस सांसदों के बिना अनुमति प्रवेश के मामले पर कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी चिंता व्यक्त की है।
विद्वानों और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
विश्वविद्यालय के मौजूदा हालात पर उर्दू साहित्य के विद्वान सिद्दीकुर रहमान किदवई ने अपनी राय रखते हुए कहा, "जामिया में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है कि कैंपस में लोग इस तरह आपस में भिड़ जाएं और पोस्टर अभियान चलाने लगें। छात्र संघ और शिक्षक संघ हमेशा साथ मिलकर बातचीत के जरिए कैंपस के मुद्दों को सुलझाते रहे हैं। कैंपस में लोगों के बीच कभी इस स्तर की हिंसा या दुश्मनी नहीं देखी गई।" वहीं, सामाजिक और महिला अधिकार कार्यकर्ता सैयदा हमीद ने प्रशासन के रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा, "ये तीन मांगें, जिन्हें मैंने यहां लिखा है... इनके जवाब में बस गोल-मोल बातें कही गई हैं। यह टालमटोल करने वाला जवाब है। इन मांगों पर एक स्पष्ट और निश्चित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई की जानी चाहिए।" इस मामले पर एनएसयूआई के पूर्व सोशल मीडिया प्रमुख जीशान खान ने भी अपने विचार रखे।
संस्थापक परिवार की सदस्य ने भी उठाई आवाज़
छात्र संघ की बहाली के समर्थन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता समीना मिश्रा ने भी छात्रों का साथ दिया। समीना मिश्रा जामिया के सह-संस्थापक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की परपोती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय से अपने गहरे जुड़ाव का ज़िक्र करते हुए कहा, "मैं इस संस्थान की पूर्व छात्रा हूं और इसी इलाके में रहती हूं। मेरा जन्म भले ही संस्थापक परिवार में हुआ हो, लेकिन इस विश्वविद्यालय के साथ मेरा एक गहरा और व्यक्तिगत जुड़ाव भी है। जामिया में एक छात्रा के तौर पर बिताए गए दो साल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण रहे। उन सालों ने मेरे नजरिए को आकार दिया। उसी दौरान मैंने दुनिया को समझना, ज्ञान हासिल करना, नए विचार पैदा करना और उनके अर्थ खोजना सीखा।"
प्रशासन और छात्रों का पक्ष
इस पूरे प्रकरण में जामिया प्रशासन का कहना है कि परिसर में शांति स्थापित करने के लिए बातचीत का दौर जारी है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत अन्य के खिलाफ कैंपस में बिना इजाज़त घुसने और दीवारों पर विवादित पोस्टर चिपकाने के आरोप में FIR दर्ज की गई है।
इनपुट: IANS



