अघोषित विदेशी संपत्ति: सरकार की नई स्कीम को मिल रहा शानदार रिस्पॉन्स, 1100 लोगों ने किया खुलासा
केंद्र सरकार की एक खास योजना के तहत अब तक करीब 1,100 करदाता अपनी अघोषित विदेशी संपत्ति का ब्योरा दे चुके हैं। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, 'छोटे करदाताओं के लिए विदेशी संपत्ति –…
केंद्र सरकार की एक खास योजना के तहत अब तक करीब 1,100 करदाता अपनी अघोषित विदेशी संपत्ति का ब्योरा दे चुके हैं। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, 'छोटे करदाताओं के लिए विदेशी संपत्ति – प्रकटीकरण योजना, 2026' को शुरुआती तौर पर काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। यह योजना उन लोगों को एक मौका देती है जो अब तक अपनी विदेशी संपत्ति और आय की जानकारी सरकार को नहीं दे पाए थे।
इस योजना के तहत, करदाता 31 दिसंबर, 2026 तक अपनी अघोषित संपत्ति का खुलासा कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें संपत्ति के उचित बाजार मूल्य (Fair Market Value) पर 30% टैक्स और उतना ही जुर्माना भरना होगा। एक बार वैध घोषणा करने पर, व्यक्ति को 'काला धन अधिनियम, 2015' के तहत आगे की जांच, अतिरिक्त जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा मिल जाती है।
कैसे काम करती है यह योजना?
सूत्रों ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, विश्वास-आधारित और स्व-घोषणा (सेल्फ-डिक्लेरेशन) पर चलती है। करदाताओं की सुविधा के लिए, आयकर विभाग ने ई-फाइलिंग पोर्टल पर एक खास सुविधा भी शुरू की है। इसके जरिए करदाता 2022 से 2024 तक की उन विदेशी संपत्तियों की जानकारी देख सकते हैं, जो दूसरे देशों से 'ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन' (AEOI) के तहत भारत को मिली हैं।
यह जानकारी सीआरएस/एफएटीसीए जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत साझा की जाती है। हालांकि, पोर्टल पर केवल यही जानकारी उपलब्ध है। विभाग को अन्य स्रोतों और खुफिया जानकारियों से भी सूचनाएं मिलती हैं, जिन्हें सुरक्षा कारणों से पोर्टल पर नहीं दिखाया गया है।
जागरूकता बढ़ाने पर सरकार का जोर
विभाग ने हाल ही में उन चुनिंदा करदाताओं से भी संपर्क किया है जिन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में संपत्तियों में निवेश किया है। 23 अक्टूबर 2026 को हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में यह भी तय किया गया कि जहां भी संभव हो, ऐसी जानकारी संबंधित करदाताओं से साझा की जाएगी ताकि वे इस योजना का लाभ उठा सकें।
इसके अलावा, सरकार करदाताओं, कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग संघों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए कई आउटरीच कार्यक्रम भी चला रही है। करदाताओं की समस्याओं को हल करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने हर क्षेत्र में प्रधान मुख्य आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई है।
इनपुट: IANS



