बांग्लादेश में खसरा का बढ़ता कहर, 24 घंटे में 6 और बच्चों की मौत, कुल आंकड़ा 1200 पार
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है, जहाँ पिछले 24 घंटों में छह और बच्चों की जान चली गई। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन नई मौतों के साथ इस साल बीमारी से मरने…
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है, जहाँ पिछले 24 घंटों में छह और बच्चों की जान चली गई। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन नई मौतों के साथ इस साल बीमारी से मरने वाले बच्चों का कुल आंकड़ा 1,233 तक पहुँच गया है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने सोमवार सुबह तक के आँकड़े जारी करते हुए यह जानकारी दी।
एजेंसी की रिपोर्ट बताती है कि हाल में हुई सभी छह मौतों को खसरे के संदिग्ध मामलों के तौर पर दर्ज किया गया है। इसके साथ ही, पिछले 24 घंटों में 1,388 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 2,22,552 हो गई है। इसी अवधि में 78 नए पुष्ट मामलों की भी पुष्टि हुई, जिससे कुल पुष्ट मामलों का आंकड़ा 23,478 पर पहुँच गया है। हालांकि, खसरे से हुई पुष्ट मौतों की संख्या 104 पर स्थिर है, जबकि संदिग्ध मौतों का आंकड़ा बढ़कर 1,129 हो गया है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार
इस महीने की शुरुआत में 'द संडे गार्डियन' से बात करते हुए देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस प्रकोप को 'महामारी' बताते हुए इसके लिए सरकारी लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों के कारण वैक्सीन खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई, जिससे टीकाकरण में एक बड़ा अंतर पैदा हुआ।
शेख हसीना ने दावा किया कि मार्च 2026 में ही देश में मीजल्स-रुबेला वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो गया था, जिसके बाद टीकाकरण कवरेज में भारी गिरावट आई। उन्होंने यह भी कहा, "एक ऐसी बीमारी से एक हजार से अधिक बच्चों की मौत, जिसे रोका जा सकता था, सिर्फ एक सामान्य प्रशासनिक विफलता नहीं है।" उन्होंने वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने, विशेष टीकाकरण अभियान चलाने और खरीद में हुई गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
विशेषज्ञों की राय और मौजूदा स्थिति
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' के मुताबिक, सरकार ने अप्रैल में यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन की खरीद फिर से शुरू कर दी और आपातकालीन टीकाकरण अभियान भी चलाए। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण की तेज रफ्तार को देखते हुए स्थिति को नियंत्रित करने में समय लग सकता है।
DGHS के पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक डॉ. बेनजीर अहमद ने भी इस महीने कहा था कि संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है। वहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन ने 'द डेली स्टार' को बताया कि वैक्सीन लगने के बाद बच्चों में प्रतिरक्षा विकसित होने में तीन से चार हफ्ते लगते हैं, इसलिए संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने और मौतों की मौजूदा लहर कम से कम एक महीने और जारी रह सकती है।
इनपुट: IANS



