क्या शाम पांच बजे बाद भोलेनाथ को जल नहीं चढता है
https://www.youtube.com/watch?v=mfwexRYRTm0 भोलेनाथ को जल चढ़ाने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. शिंवलिंग भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है.

भोलेनाथ को जल चढ़ाने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. शिंवलिंग भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है. शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है. आप शाम 5 बजे के बाद भी शिवलिंग पर जल चढ़ा सकते हैं. शिवरात्रि के दिन जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त सुबह भी होता है. इसके साथ ही शिवरात्रि के दिन शाम के समय भी जल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता. शाम को 5 बजे के बाद भी भोलेनाथ को जल चढ़ाया जा सकता है.

भगवान शिव को हिंदू धर्म में अनेंक नामों से जाना जाता है. जिसमें आमतौर पर काफी लोग भोलेनाथ के नाम से जानते हैं. वहीं दूसरी तरफ उन्हें सृष्टि का विनाशक भी कहा जाता है. जो श्मशान में रहते हैं और जिनके शरीर पर भस्म लिपटी रहती है तथा जो भूत-प्रेत के साथ रहते हैं.

भोलेनाथ ऐसे देव जिन्हें प्रसन्न करना बहुत ही आसान है. इस शब्द का दार्शनिक मतलब है- भोले यानी बच्चे जैसी मासूमियत तथा नाथ का मतलब होता है- देवता या स्वामी अर्थात ऐसा मालिक जो बहुत भोला हो. भगवान शिव के अंदर ना अहं है, ना ही चालाकी. उन्हें अपनी शक्ति पर बिल्कुल भी अभिमान नहीं है इसीलिए उनको भोलेनाथ कहा जाता है.
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भोलेनाथ को जल चढाना उनकी पूजा करने और प्रसन्न करने का एक तरीका है. जिससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं तथा जो भी मनोकामना लेकर हम भोलेनाथ को जल चढ़ाते हैं, वह मनोकामना हमारी जल्द पूरी हो जाती है. सोमवार का दिन भगवान भोलनाथ का दिन माना जाता है. उस दिन हमें भगवान शिव का व्रत रखना चाहिए तथा नजदीक के मंदिर में जाकर भोलेनाथ को जल चढ़ाना चाहिए. जिससे भोलेनाथ की कृपा हम पर बनी रहती है. जिसके कारण हमारे जीवन में हमेशा खुशहाली रहती है. शाम 5 बजे के बाद भी हम भगवान को जल चढ़ा सकते हैं.



