आतंकी ट्रेनिंग मामला: 7 विदेशी नागरिकों की जांच के लिए NIA को मिली 180 दिन की मोहलत, हाई कोर्ट ने भी दी मंजूरी
म्यांमार में आतंकी समूहों को हथियार और ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार सात विदेशी नागरिकों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को जांच पूरी करने के लिए अब 180 दिनों का समय…
म्यांमार में आतंकी समूहों को हथियार और ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार सात विदेशी नागरिकों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को जांच पूरी करने के लिए अब 180 दिनों का समय मिलेगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने जांच की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आरोपियों ने पटियाला हाउस कोर्ट के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है। आरोपियों में छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक शामिल हैं, जिन पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है।
क्या हैं पूरा मामला और आरोप?
NIA के मुताबिक, इन विदेशी नागरिकों पर आरोप है कि वे म्यांमार के एक जातीय समूह (ethnic group) के संपर्क में थे और उन्होंने वहां के आतंकी गुटों को प्रशिक्षण दिया था। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने यूरोप से ड्रोन मंगवाकर उन्हें म्यांमार भेजा और आतंकियों को उनका इस्तेमाल करना सिखाया। इन सभी को म्यांमार से भारत लौटने पर गिरफ्तार किया गया था।
विभिन्न शहरों से हुई थी गिरफ्तारी
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान भी उजागर की गई है। अमेरिकी नागरिक का नाम मैथ्यू वैनडाइक है, जिसे कोलकाता से गिरफ्तार किया गया था। वहीं, छह यूक्रेनी नागरिकों में हर्बा पेट्रो, स्लिवियाक टारस, इवान सुकमनोवस्की, स्टीफन मारियन, होंचारुक मकसीम और कामिनिस्की विक्टर शामिल हैं। इनमें से तीन को दिल्ली और तीन को लखनऊ से पकड़ा गया था।
क्यों चाहिए जांच के लिए अतिरिक्त समय?
एनआईए ने अदालत में दलील दी थी कि यह मामला एक बड़ी आपराधिक साजिश का हिस्सा है जिसके तार भारत समेत कई देशों से जुड़े हुए हैं। एजेंसी के अनुसार, इस बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने और विदेशों तक फैले नेटवर्क की हर कड़ी को जोड़ने के लिए अधिक समय की आवश्यकता है। NIA का मानना है कि विदेशी धरती पर आतंकियों को सैन्य प्रशिक्षण और ड्रोन जैसी तकनीक मुहैया कराना एक गंभीर सुरक्षा खतरा है, जिसके हर पहलू की जांच जरूरी है।
इनपुट: IANS



