दक्षिण कोरिया: पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ़ 180 दिन की विशेष जांच पूरी, सत्ता के दुरुपयोग सहित कई आरोप तय
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल और उनकी पत्नी किम कियोंग-ही समेत 58 लोगों के खिलाफ़ एक विशेष जांच दल ने विभिन्न मामलों में आरोप तय किए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह…
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल और उनकी पत्नी किम कियोंग-ही समेत 58 लोगों के खिलाफ़ एक विशेष जांच दल ने विभिन्न मामलों में आरोप तय किए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई 180 दिनों तक चली एक व्यापक जांच के बाद सोमवार को पूरी हुई। यह जांच यून के 2024 के असफल मार्शल लॉ प्रयास, भ्रष्टाचार और एक मरीन सैनिक की मौत जैसे गंभीर मामलों पर केंद्रित थी।
फरवरी में शुरू हुई इस विशेष जांच (स्पेशल काउंसल) की अगुवाई क्वोन चांग-यंग कर रहे थे। जांच का मुख्य उद्देश्य उन मामलों की दोबारा पड़ताल करना था जिनकी पिछली तीन जांच टीमों द्वारा पूरी तरह से छानबीन नहीं हो पाई थी। जांच का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही टीम ने 150 लोगों से जुड़े 46 मामले आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंप दिए हैं।
पूर्व राष्ट्रपति यून और उनकी पत्नी पर लगे आरोप
जांच दल ने पूर्व राष्ट्रपति यून पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। जांच में पाया गया कि उन्होंने अपने असफल मार्शल लॉ के कदम को अमेरिका और अन्य प्रमुख साझेदार देशों के सामने सही ठहराने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए थे। इस मामले में पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिन वॉन-सिक और पूर्व प्रधान उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार किम ताए-ह्यो को भी आरोपी बनाया गया है।
इसके अलावा, यून की पत्नी किम कियोंग-ही पर भी आरोप तय किए गए हैं। उन पर 2022 में राष्ट्रपति भवन के स्थानांतरण से जुड़ी एक परियोजना में अनुचित रूप से हस्तक्षेप करने का आरोप है। जांचकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने एक अयोग्य कंपनी को निर्माण का ठेका दिलाने की कोशिश की थी।
जांच का दायरा और अवधि
यह जांच मूल रूप से फरवरी में शुरू हुई थी, जिसे बाद में 23 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया गया था। राष्ट्रीय सभा ने जुलाई में जांच की अवधि 30 दिन बढ़ाने को मंजूरी दी थी और साथ ही जांच दल में सरकारी अधिकारियों की अधिकतम संख्या 130 से बढ़ाकर 150 कर दी थी।
गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में यून सुक-योल द्वारा मार्शल लॉ लागू करने की नाकाम कोशिश के बाद देश में एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था, जिसके चलते अंततः उन्हें राष्ट्रपति पद से हटा दिया गया था। उनके खिलाफ़ चल रही यह कानूनी कार्रवाई दक्षिण कोरिया की राजनीति में एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।
इनपुट: IANS



