प्रशांत महासागर में खनन की अमेरिकी योजना: द्वीपीय क्षेत्रों ने पर्यावरण और मछली उद्योग पर मंडराते खतरे को लेकर जताई चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने प्रशांत महासागर में गहरे समुद्र के भीतर खनिजों के खनन का एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसका प्रशांत क्षेत्र के द्वीपों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। समाचार…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने प्रशांत महासागर में गहरे समुद्र के भीतर खनिजों के खनन का एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसका प्रशांत क्षेत्र के द्वीपों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 18 अगस्त को रखे गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता कम करना और घरेलू आपूर्ति को बढ़ाना है। हालांकि, स्थानीय नेताओं और पर्यावरण समूहों ने इस योजना से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
यह प्रस्ताव अमेरिकी गृह मंत्रालय की एजेंसी, मरीन मिनरल एडमिनिस्ट्रेशन (एमएमए) द्वारा जारी किया गया है। इसके तहत उत्तरी मारियाना द्वीप समूह और गुआम के तट के पास समुद्र की सतह के 2.8 करोड़ हेक्टेयर (6.9 करोड़ एकड़) क्षेत्र में गहरे समुद्र में खनन के लिए पट्टों (लीज) की नीलामी की जाएगी। प्रशासन का तर्क है कि इन समुद्री तलछटों में निकल, कोबाल्ट और मैंगनीज जैसे खनिज मौजूद हैं, जो बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
स्थानीय नेतृत्व का कड़ा विरोध
प्रशांत महासागर के कई द्वीपीय क्षेत्रों के नेताओं ने इस योजना पर अपनी असहमति जताई है। उत्तरी मारियाना द्वीप समूह के गवर्नर डेविड अपाटांग ने 'द गार्डियन' से कहा कि उनका प्रशासन प्रस्ताव की बहुत सावधानी से समीक्षा करेगा। उन्होंने खनन से पहले व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, पारदर्शिता और समुद्री संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
वहीं, गुआम के लेफ्टिनेंट गवर्नर जोशुआ टेनोरियो ने योजना का स्पष्ट रूप से विरोध करते हुए कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा या महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत के नाम पर प्रशांत क्षेत्र के लोगों को ऐसे पर्यावरणीय जोखिम स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जिनका अभी पर्याप्त अध्ययन ही नहीं हुआ है।"
मछली उद्योग और पर्यावरण पर असर की चिंता
अमेरिकी समोआ के गवर्नर प्यूला निकोलाओ ने भी इस खनन योजना का विरोध किया है। उन्होंने इस क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण टूना मछली उद्योग पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया है।
इसी बीच, अमेरिकी समोआ और हवाई के पर्यावरण समूहों ने ट्रंप प्रशासन की इस योजना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। उनका आरोप है कि सरकार ने समुद्री जीवन के आवास को नुकसान, समुद्र तल की तलछट और खनन गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले तेज शोर जैसे गंभीर खतरों का पर्याप्त मूल्यांकन नहीं किया है। रॉयटर्स के मुताबिक, प्रशासन का मानना है कि यह कदम राष्ट्रीय हित में है और इससे देश की खनिज आपूर्ति सुरक्षित होगी।
इनपुट: IANS



