राजस्थान की जोजरी नदी: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, तट से 100 मीटर के दायरे में निर्माण पर तत्काल रोक
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी नदी के पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। सोमवार को दिए अपने फैसले में, शीर्ष अदालत ने नदी के दोनों किनारों से 100 मीटर के…
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी नदी के पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। सोमवार को दिए अपने फैसले में, शीर्ष अदालत ने नदी के दोनों किनारों से 100 मीटर के दायरे में सभी प्रकार के निर्माण और विकास कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रतिबंध तब तक प्रभावी रहेगा जब तक कि वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत नदी की बाढ़ सीमा (floodplain) और पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र (buffer zone) का सटीक निर्धारण और सीमांकन नहीं हो जाता।
यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने एक स्वतः संज्ञान (suo motu) मामले की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि नदी और उसके आसपास के पर्यावरण को पहले ही काफी नुकसान पहुँच चुका है, इसलिए एक निश्चित और मापने योग्य सुरक्षा क्षेत्र बनाना आवश्यक है। पीठ ने कहा, "हमारी राय है कि... नदी के इकोसिस्टम की ठीक से सुरक्षा के लिए एक अंतरिम, निश्चित और मापने योग्य सुरक्षा क्षेत्र बनाना जरूरी है।"
प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर भी प्रतिबंध
निर्माण पर रोक के अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने एक और सख्त निर्देश जारी किया है। इसके तहत, नदी की मौजूदा बाढ़ सीमा से दोनों तरफ 500 मीटर के भीतर किसी भी ऐसे उद्योग या गतिविधि को अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे नदी में प्रदूषण, गंदगी या किसी अन्य प्रकार का पर्यावरणीय नुकसान होने की आशंका हो। यह कदम नदी को औद्योगिक कचरे से बचाने के लिए उठाया गया है।
कैसे शुरू हुआ यह मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान तब लिया था, जब एक डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से जोधपुर, पाली और बाड़मेर जिलों में जोजरी नदी में भारी प्रदूषण की भयावह स्थिति का खुलासा हुआ। इससे पहले, नवंबर 2025 में, अदालत ने जोजरी, बांडी और लूनी नदियों की सफाई के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा 2022 में दिए गए निर्देशों को फिर से लागू किया था। इसी के साथ, मामले की निगरानी के लिए राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र निगरानी समिति का भी गठन किया गया था।
इनपुट: IANS



