FATF की बैठक में चीन ने नहीं दिया पाकिस्तान का साथ

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पाकिस्तान को एक बहुत ही बड़ा झटका लगा है. आमतौर पर उसका साथ देने वाले चीन ने भी उसका साथ नहीं दिया. दरअसल हुआ ये कि जून में फिर से फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (The Financial Action Task Force) की बैठक होने वाली है.अब तक चीन हमेशा उसका साथ देता आया है, लेकिन इस बार चीन और साऊदी अरब ने पाकिस्तान को साफ-साफ शब्दों में आतंकवाद के खिलाफ कारवाई करने तथा फंडिंग रोकने को कहा है. पाकिस्तान हर बार फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की बैठक से पहले दावा करता है कि वो आतंकवाद पर कारवाई करेगा. लेकिन उसका फिर वहीं रवैया रहता है. इन दोनों देशों ने कहा है कि पाकिस्तान को अगली बैठक से पहले और एक समय सीमा में आतंक के आकाओं के खिलाफ कारवाई भी करनी होगी.


फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स क्या है ?
फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स वर्ष 1989 में जी-7 की पहल पर स्थापित एक अंतः सरकारी संस्था है और इसका उद्देश्य ‘आतंकवाद की फंडिंग’, ‘ड्रग्स तस्करी’ और ‘हवाला कारोबार’ पर नज़र रखना है. यह किसी भी देश को अगर निगरानी सूची में रखती है उसके बावजूद भी वो देश कार्रवाई न करे तो यह संस्था उसे ‘खतरनाक देश’ घोषित कर सकती है।

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इंड़ियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट से बचाने के लिए तुर्की अंतिम समय तक पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा. इस रिपोर्ट के अनुसार संभावना ये है कि इस बार तो पाकिस्तान ब्लैकलिस्ट होने से बच जाएगा, लेकिन यदि उसने जून तक आतंकवाद पर कारवाई और आतंकी फंड़िग नहीं रोकी तो इसके अगली बैठक में उसको गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेगें.