शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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घर खरीदारों से ₹386 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, ED ने दिल्ली-NCR में कई ठिकानों पर की छापेमारी

घर खरीदारों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र…

घर खरीदारों से ₹386 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, ED ने दिल्ली-NCR में कई ठिकानों पर की छापेमारी
(फोटो: IANS)

घर खरीदारों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सात स्थानों पर तलाशी और सर्वे अभियान चलाया। यह कार्रवाई 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के तहत की गई, जिसका मकसद फंड के कथित हेरफेर और डायवर्जन की जांच करना है।

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ईडी के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने यह अभियान बुधवार और गुरुवार को चलाया। जांच के केंद्र में ताशी लैंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, केएनएस इन्फ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड, सोनी इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और मौजूदा रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल काशी नाथ शुक्ला समेत इनसे जुड़ी अन्य कंपनियां और व्यक्ति हैं।

क्या हैं धोखाधड़ी के आरोप?

प्रवर्तन निदेशालय की यह जांच दिल्ली और हरियाणा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज कई FIR और चार्जशीट पर आधारित है। ये मामले मुख्य रूप से दो रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़े हैं — गुरुग्राम के सेक्टर-111 में 'ताशी कैपिटल गेटवे प्रोजेक्ट' और सेक्टर-68 में 'ओरियन गैलेक्सी प्रोजेक्ट' (जिसे पहले 'स्पायर साउथ' कहा जाता था)।

आरोपों के मुताबिक, इन परियोजनाओं में घर खरीदारों और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की गई। इसके अलावा, स्वामिह इन्वेस्टमेंट फंड के साथ कथित धोखाधड़ी, हाउसिंग लोन फ्रॉड और निवेशकों के फंड को दूसरी जगह लगाने जैसे गंभीर आरोप भी जांच के दायरे में हैं।

निवेशकों के सैकड़ों करोड़ रुपये का गबन

जांच में यह बात सामने आई है कि ताशी ग्रुप ने 600 से अधिक घर खरीदारों से लगभग 386 करोड़ रुपये एकत्र किए, लेकिन 10 से 15 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया। ईडी की पड़ताल बताती है कि ग्रुप ने निवेशकों के फंड से करीब 120 करोड़ रुपये का गबन किया, जिसमें स्वामिह फंड द्वारा निवेश किए गए 98 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।

एजेंसी अब मनी ट्रेल, कंपनियों के बीच हुए लेनदेन और एक प्रोजेक्ट के फंड को दूसरे में ट्रांसफर किए जाने की जांच कर रही है, ताकि अपराध से हुई कुल कमाई का पता लगाया जा सके।

प्रमोटर के परिवार पर विदेश में निवेश का शक

ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मुख्य प्रमोटर काशी नाथ शुक्ला के परिवार के सदस्य कथित तौर पर विदेश में बस गए हैं और उन्होंने पिछले 5 से 10 वर्षों में भारत में अपनी बड़ी संपत्तियों को बेच दिया है। जांच में यह भी पता चला है कि उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर विदेशी कंपनियों में बड़ा निवेश है, जिसमें ब्रिटेन में एक ओल्ड एज केयर होम का संचालन भी शामिल है। इतना ही नहीं, परिवार के एक सदस्य ने निवेश के जरिए सेंट किट्स की नागरिकता के लिए भी आवेदन किया था।

छापेमारी में क्या मिला?

तलाशी अभियान के दौरान जांच एजेंसियों ने कई अहम दस्तावेज, विदेशी निवेश से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा जब्त किए हैं। इसके अलावा, 22 लाख रुपये की जमा राशि वाले बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज कर दिया गया है। साथ ही एक लग्जरी कार भी जब्त की गई है। ईडी इस मामले में आगे की जांच कर रही है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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