मंगलवार, 4 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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चीनी AI मॉडल से अमेरिकी टेक जगत में हलचल, ओपन सोर्स तकनीक बन रही दुनिया की पसंद

चीन के ओपन-सोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल वैश्विक बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं, जिससे अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों में चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट…

चीनी AI मॉडल से अमेरिकी टेक जगत में हलचल, ओपन सोर्स तकनीक बन रही दुनिया की पसंद
(फोटो: IANS)

चीन के ओपन-सोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल वैश्विक बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं, जिससे अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों में चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने चीनी AI की इस बढ़त पर ध्यान केंद्रित किया है। चीन के ये मॉडल, जो डेवलपर्स के लिए मुफ्त या कम लागत पर उपलब्ध हैं, अमेरिकी कंपनियों के महंगे 'क्लोज्ड-सोर्स' मॉडल के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं।

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चीन की कंपनी मूनशॉट AI द्वारा विकसित 'किमी के3' (Kimi K3) मॉडल इसका एक बड़ा उदाहरण है। एसोसिएटेड प्रेस और जर्मन अख़बार 'डाई जीट' के मुताबिक, अमेरिका सहित कई देशों के डेवलपर्स इस मॉडल को अपना रहे हैं। इसकी बढ़ती लोकप्रियता का आलम यह है कि ओपन-आई (OpenAI) और एंथ्रोपिक (Anthropic) जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियों ने इस मामले में अपनी सरकार से हस्तक्षेप की मांग तक कर डाली है।

तकनीकी बाज़ार में दो गुट

इस मुद्दे पर अमेरिकी टेक उद्योग दो धड़ों में बंटा नज़र आ रहा है। एक तरफ जहां बड़ी कंपनियां विदेशी ओपन-सोर्स मॉडल पर रोक लगाने की मांग कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर 179 अमेरिकी कंपनियों ने इसका कड़ा विरोध किया है। इन कंपनियों ने व्हाइट हाउस को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि विदेशी ओपन-सोर्स मॉडल तक स्टार्टअप्स की पहुंच को रोकना प्रतिस्पर्धा को कमजोर करेगा और नवाचार के लिए हानिकारक होगा।

ब्रिटिश अख़बार 'फाइनेंशियल टाइम्स' ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि चीन AI विकास का एक वैकल्पिक मॉडल दुनिया के सामने रख रहा है। इस मॉडल का लक्ष्य ओपन-सोर्स के जरिए AI तकनीक को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। अमेरिकी पत्रिका 'फॉर्च्यून' ने भी इस बात पर जोर दिया है कि अमेरिकी संरक्षणवादी नीतियों के चलते भविष्य में चीनी AI मॉडल की मांग और भी बढ़ सकती है, क्योंकि चीनी कंपनियां अपने मॉडल मुफ्त में उपलब्ध करा रही हैं।

विकासशील देशों के लिए नया विकल्प

रिपोर्ट्स के अनुसार, 'ग्लोबल साउथ' यानी विकासशील देशों के लिए अमेरिकी क्लोज्ड-सोर्स AI मॉडल बहुत महंगे पड़ते हैं। ऐसे में चीन की पहल इन देशों के लिए एक बड़ा अवसर बन सकती है। चीन न केवल अपनी तकनीक और ओपन-सोर्स AI मॉडल इन देशों तक पहुंचाना चाहता है, बल्कि हजारों प्रशिक्षण अवसर और AI एप्लीकेशन सेंटर भी उपलब्ध कराने की तैयारी में है। प्रस्तावित 'विश्व AI सहयोग संगठन' इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।

इनपुट: IANS

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