8वां वेतन आयोग: फिटमेंट फैक्टर पर टिकी निगाहें, जानिए 3.61 से 4.00 की मांग पर कितना बढ़ सकता है न्यूनतम वेतन
केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आयोग के गठन को 3 सितंबर को 10 महीने पूरे हो रहे हैं और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार…
केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आयोग के गठन को 3 सितंबर को 10 महीने पूरे हो रहे हैं और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार 'फिटमेंट फैक्टर' कितना होगा, क्योंकि यही वो गुणांक है जो कर्मचारियों के मूल वेतन में बढ़ोतरी की दिशा तय करता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विभिन्न कर्मचारी संगठन इस बार पिछले वेतन आयोगों की तुलना में काफी बड़े फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये है, जो 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय हुआ था। उस समय 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गया था। इससे पहले, छठे वेतन आयोग में यह फैक्टर 1.86 था।
विभिन्न संगठनों की मांगें और वेतन का अनुमान
8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों ने अलग-अलग प्रस्ताव रखे हैं, जिससे न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है:
- 3.61 फिटमेंट फैक्टर: सर्वे ऑफ इंडिया की मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (एमएसए) ने यह प्रस्ताव दिया है। अगर यह मांग मानी जाती है तो न्यूनतम मूल वेतन लगभग 64,980 रुपये (करीब 65,000 रुपये) हो सकता है।
- 3.833 फिटमेंट फैक्टर: नेशनल काउंसिल-जेसीएम (एनसीजेसीएम) स्टाफ साइड और भारत पेंशनर्स समाज (बीपीएस) ने यह मांग रखी है। इसके लागू होने पर न्यूनतम वेतन करीब 69,000 रुपये तक पहुंच सकता है।
- 4.00 फिटमेंट फैक्टर: सबसे बड़ी मांग भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (बीपीएमएस) ने की है। यदि सरकार इसे स्वीकार करती है, तो न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर 72,000 रुपये हो जाएगा।
इन प्रस्तावों के आधार पर न्यूनतम और अधिकतम मांग के बीच वेतन में ही लगभग 7,020 रुपये प्रति माह का अंतर दिखाई देता है।
अंतिम फैसला कई बातों पर निर्भर
विशेषज्ञों का कहना है कि ये सभी आंकड़े केवल अनुमान हैं और इन्हें अंतिम वेतन नहीं माना जाना चाहिए। वेतन में वास्तविक वृद्धि सिर्फ फिटमेंट फैक्टर पर ही नहीं, बल्कि नए वेतन मैट्रिक्स, महंगाई भत्ते और आयोग की अन्य सिफारिशों पर भी निर्भर करेगी। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग के पास अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय है। इन सिफारिशों का असर लाखों पेंशनभोगियों पर भी पड़ेगा, क्योंकि उनकी पेंशन और अन्य लाभ भी मूल वेतन से जुड़े होते हैं। फिलहाल, सभी को आयोग की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
इनपुट: IANS



