सोशल मीडिया पर बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री: NHRC ने केंद्र, मेटा और कई राज्यों की पुलिस को भेजा नोटिस
सोशल मीडिया पर बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री की मौजूदगी के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। एक गैर-लाभकारी संस्था की शिकायत का संज्ञान लेते हुए आयोग ने…
सोशल मीडिया पर बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री की मौजूदगी के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। एक गैर-लाभकारी संस्था की शिकायत का संज्ञान लेते हुए आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, मेटा इंडिया और कई राज्यों के पुलिस प्रमुखों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शिकायत में दावा किया गया है कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऐसे कई लिंक मौजूद हैं, जिनमें बच्चों के लिए अनुपयुक्त और कथित तौर पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) हो सकती है।
आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ ने कहा कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बच्चों के मानवाधिकारों का एक गंभीर उल्लंघन होगा। साथ ही यह पॉक्सो अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत एक दंडनीय अपराध भी है।
विभिन्न एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश
NHRC ने अपनी कार्रवाई में कई पक्षों को शामिल किया है और उनसे विशिष्ट जवाब मांगे हैं। आयोग ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और मेटा इंडिया के कानून प्रवर्तन प्रमुख को सीधे नोटिस भेजा है।
इसके अतिरिक्त, ओडिशा, हरियाणा, नई दिल्ली, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़ और बिहार के डीजीपी को भी निर्देश दिए गए हैं। उनसे कहा गया है कि वे शिकायत में दिए गए URL और डिजिटल सबूतों की तत्काल अपनी साइबर क्राइम यूनिट और विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) से जांच कराएँ। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई संज्ञेय अपराध पाया जाता है, तो तुरंत FIR दर्ज की जानी चाहिए। साथ ही, सामग्री बनाने वाले, अपलोड करने वाले या फैलाने वाले व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
पीड़ित बच्चों की सुरक्षा और सामग्री पर रोक
आयोग ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिया है कि यदि जांच के दौरान किसी भी बच्चे की पहचान पीड़ित के रूप में होती है, तो उसे तत्काल बचाव, चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास जैसी सभी आवश्यक कानूनी मदद मुहैया कराई जाए।
मेटा और मंत्रालय की जवाबदेही: आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से पूछा है कि आपत्तिजनक URLs को हटाने या ब्लॉक करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी सामग्री को दोबारा अपलोड होने से रोकने के लिए क्या व्यवस्था है। वहीं, मेटा इंडिया से कथित सामग्री को हटाने पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी गई है। मेटा को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह संबंधित खातों के मेटाडेटा, आईपी लॉग और अन्य डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखे। साथ ही, यदि सामग्री में CSAM की पुष्टि होती है तो पॉक्सो कानून के तहत स्थानीय पुलिस को सूचित करने के संबंध में की गई कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा गया है।
इनपुट: IANS



