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आखिरकार आठ दिन बाद खत्म हुई ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल, मांगों के लिए बनी कमेटी

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नई दिल्ली: आठ दिनों से चल रही ट्रांसपोर्टरों की देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल बीते दिन खत्म हो चुकी है. इस हड़ताल के कारण लगभग 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है. आपको बता दें कि विभिन्न प्रकार की मांगों को लेकर चल रही यह हड़ताल 20 जुलाई से शुरू हुई थी. पर अब इस देशव्यापी हड़ताल खत्म हो जाने के बाद से ट्रांसपोर्टेशन का काम दोबारा से शुरू हो जाएगा.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया ऐलान

बता दें कि आठ दिनों से चल रही इस हड़ताल के समाप्त होने पर व्यापारियों ने राहत की  सांस ली है. इस बात का ऐलान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है. उन्होंने कहा है कि ट्रांसपोर्टरों की कुछ मांगे पहले ही पूरी कर ली गई थी, बाकी बची मांगों के लिए कमेटी गठित की गई है. हड़ताल खत्म होने के बाद केंद्रीय परिवहन और हाइवे मंत्रालय व ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने कई दौर की बैठकों के बाद संयुक्त वक्तव्य जारी किया.

यह भी पढ़ें: 20 जुलाई से देशभर में ट्रांसपोर्टर की हड़ताल

इस हड़ताल के दौरान ट्रांसपोर्टरों को राज्य में पर्यटन बस और स्कूल बस ऑपरेटरों के अलावा भारत के विभिन्न संगठनों का समर्थन मिला. अपनी मांग को लेकर उतरे ट्रांसपोर्टरों ने देशभर में करीब 93 लाख और महाराष्ट्र में तकरीबन 16 लाख ट्रकों नही चलाए.

क्या थी मांगे

इस हड़ताल की मांगों में डीजल में बढोत्तरी, अधिक टोल शुल्क, भारी बीमा दर, जीएसटी और ई-वे बिल का बोझ, स्कूल बसों के लिए टोल छोड़ने और बंदरगाह की भीड़ को कम करना शामिल था. देशव्यापी हड़ताल से पहले सरकार ने ट्रांसपोर्टरों को मनाने की खूब कोशिश की. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उनकी मांगों के प्रसंग में ऐलान किया. इनमें ट्रकों के एक्सल लोड में 25-35 फीसद तक में इजाफा, दो साल में फिटनेस सर्टिफिकेट तथा ओवरलोडिंग पर टोल जुर्माने में कमी जैसे मुख्य ऐलान शमिल है. वहीं ट्रांसपोर्टर असोसिएशन ने दावा किया है कि केवल महाराष्ट्र में लगभग 5000 करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है.

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