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आँचल ठाकुर ने भारत के लिए पहला “इंटरनेशनल स्कीइंग” मैडल जीता

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हिमाचल के शहर मनाली की रहने वाली आँचल ठाकुर ने मंगलवार को इतिहास रच दिया. देश के लिए किसी इंटरनेशनल स्कीइंग टूर्नामेंट में मेडल जीतने वाली आंचल पहली खिलाड़ी बन गईं हैं. आँचल ने एल्पाइज एज्डेर 3200 कप में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है. आँचल ने यह मेडल स्लालम (सर्पिलाकार रास्ते) पर की गई स्की दौड़ में अपने नाम किया है. इंटरनेशनल स्कीइंग में अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाली पहली भारतीय आँचल ठाकुर को उम्मीद है कि उनके पदक से शीतकालीन खेलों के प्रति सरकार की उदासीनता खत्म होगी.

प्रधानमंत्री ने दी बधाई

मीडिया से बात करते हुए आंचल ने कहा कि महीनों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद आखिरकार मेहनत रंग लाई. मैंने यहां अच्छी शुरुआत की और शुरुआत में ही लीड बना ली, जिसकी बदौलत इस रेस को मैंने तीसरे स्थान पर खत्म किया.

तुर्की में कांस्य पदक जीतने वाली आँचल को चारों ओर से बधाई मिल रही है. उसे यकीन ही नहीं हो रहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे खुद बधाई दी है. आँचल की इस जीत पर प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करके उन्हें बधाई दी. साथ ही पीएम ने आंचल को उनके आगे के करियर के लिए शुभकामनाएं भी दी. वहीं खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने भी आंचल को बधाई दी.

आँचल ने तुर्की में मीडिया से बात करते हुए कहा ,‘‘ मैने कभी सोचा भी नहीं था कि प्रधानमंत्री मेरे लिये ट्वीट करेंगे. यह अकल्पनीय है. मैं उम्मीद करती हूं कि हमें भी दूसरे लोकप्रिय खेलों के खिलाड़ियों के समकक्ष आंका जाये. अभी तक तो सरकार से कोई सहयोग नहीं मिला है.” आँचल ने आगे कहा ,‘‘ मैं इतना ही कहना चाहती हूं कि हम जूझ रहे हैं और कड़ी मेहनत कर रहे हैं.’’

पिता को है स्कीइंग का शौक़

चंडीगढ के डीएवी कालेज की छात्रा आँचल के लिये यह सफर आसान नहीं था हालांकि उनके पिता रोशन ठाकुर भारतीय शीतकालीन खेल महासंघ के सचिव हैं और स्कीइंग के शौकीन हैं.  उनके बच्चों आंचल और हिमांशु ने कम उम्र में ही स्कीइंग को अपना लिया था.

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आँचल ने कहा ,‘‘ मैं सातवीं कक्षा से ही यूरोप में स्कीइंग कर रही हूँ. पापा हमेशा चाहते थे कि मैं स्कीइंग करूं और इसके लिये अपनी जेब से खर्च कर रहे थे. उन्होंने बिना किसी सरकारी सहायता के मुझ पर और मेरे भाई पर काफी खर्च किया.’’  उसने कहा ,‘‘ हमारे लिये और भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि भारत में अधिकांश समय बर्फ नहीं गिरती है लिहाजा हमें बाहर जाकर अभ्यास करना पड़ता था.’’ आँचल के पिता रोशन ने कहा कि भारत में गुलमर्ग और औली में ही विश्व स्तरीय स्कीइंग सुविधायें हैं लेकिन उनका रखरखाव अच्छा नहीं है.

उन्होंने कहा ,‘‘ यूरोपीय साल में दस महीने अभ्यास कर पाते हैं जबकि हमारे खिलाड़ी दो महीने ही अभ्यास कर सकते हैं क्योंकि विदेश में अभ्यास करना काफी महंगा होता है.’’

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