भारतीय जनता पार्टी अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव कराने के बारे में सोच रहीं हैं। इससे पहले लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने को लेकर भाजपा पहले ही दुसरे राजनीतिक दलों से विचार विमर्श कर चुकी हैं। आनेवाले वक्त में राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभाओं का कार्यकाल अगले वर्ष जनवरी में खत्म हो रहा हैं और भाजपा सोच रही है की जब तक लोकसभा चुनाव नहीं होते है तब तक के लिए इन राज्यों में राज्यपाल शासन लगाकर बाद में लोकसभा चुनाव के वक्त ही यहां पर विधानसभा चुनाव करवाएं जाएं।
वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त औपी रावत नें बताया है की अगर सरकार दोनों चुनावों को एक साथ करवाती है तो इसके लिए चुनाव आयोग अतिरिक्त मशीनों का ऑर्डर नहीं दे पाएगी क्योंकि इन मशीनों को खरीदने के लिए आयोग को कानूनी प्रक्रिया पुरी करनी होगी जिसमें ज्यादा वक्त लगेगा।
एकसाथ चुनाव से होगा फायदा
चुनाव विशषज्ञ मानते है की एकसाथ चुनाव करवाने से देश को फायदा होगा। इससे देश का समय, पैसा बचेगा। जिससे देश को तरक्की के रास्ते पर ले जाना आसान रहेगा। दरअसल में चुनाव करवाने में देश का समय, पैसा और मानव संसाधनों की बहुत ज़रुरत होती हैं। इसके बिना चुनाव करवाना आसान नहीं होता हैं। सरकार चाहती है की एकसाथ चुनाव होने से देश में पैसे की बचत होगी, वक्त कम लगेगा जिससे देश के अंदर जो अन्य परेशानियां है उन पर देश का ध्यान जाएगा।















