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एम. करुणानिधि की मौत के बाद परिवार में सत्ता को लेकर संघर्ष जारी

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नई दिल्ली: डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि के निधन को अभी काफी वक्त भी नहीं हुआ है इस बीच खबरें यह आ रहीं है कि उनके बेटों के बीच सत्ता संघर्ष काफी तेजी से शुरू हो गया है. बता दें कि पार्टी की कमान संभालने को लेकर परिवार के बेटों में संघर्ष शुरू हो चुका है.

तमिलनाडु में पार्टी के सभी समर्थक मेरे साथ है- एमके अलागिरी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एम. करुणानिधि  के बड़े बेटे उनके समाधि स्थल पर पहुंचकर कहा था कि पूरा DMK काडर उनके साथ है. तमिलनाडु में पार्टी के सभी समर्थक मेरे साथ है. तमाम समर्थक मुझे प्रोत्साहित भी कर रहें है. उनका यह बयान ठीक डीएमके कार्यकारी समिति की मीटिंग से पहले आया है.

इस दौरान जब उनसे भविष्य के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भविष्य की राजनीतिक योजना आने वाला समय ही बताएगा. आपको बता दें कि कुछ साल पहले ही करुणानिधि के बेटे को पार्टी से निकाल दिया गया था और तब से वह राजनीती के बाहर ही है. हालांकि, उन्होंने कहा कि वह अभी पार्टी के सदस्य नहीं है. इस बारे में वह कुछ नहीं कहना चाहते है.

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दोनों बेटों में डीएमके की राजनीतिक विरासत को लेकर जंग छिड़ी

बता दें कि पिता के मौत के बाद से ही दोनों बेटों में डीएमके की राजनीतिक विरासत को लेकर जंग छिड़ी हुई है. दोनों ही अपनी-अपनी दवेदारी पेश कर रहें है. करुणानिधि के छोटे बेटे स्टालिन को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाया गया था. वहीं बड़े बेटे एमके अलागिरी ने खुद को करुणानिधि का राजनीतिक वारिस बताया है. उन्होंने छोटे भाई स्टालिन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के फैसले पर भी सवाल उठाए है. ऐसे में यह कहना गलत नही है कि कुछ दिनों बाद सत्ता को लेकर दोनों में आपसी रंजिश दिख सकती है. साल 2014 में बड़े बेटे अलागिरी को पार्टी से निकाल दिया गया था. अब वह विरासत का दावा ठोक रहा है.

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