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शिवसेना के बाद अब ये सहयोगी दल छोड़ सकता है बीजेपी का साथ, मोदी सरकार की जीत की राह हुई मुश्किल

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नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव को लेकर अब ज्यादा समय नहीं रह गया है, ऐसे में पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती जहां एक तरफ विपक्षी पार्टियां बनी हुई है, वहीं अपने ही पार्टी के नेताओं को अपने ही दल में एकजुट करके रखना है. जहां बीजेपी चुनाव जीतने के सारे हथकंडे अपना रहीं है, लेकिन फिर भी मोदी सरकार की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है. हाल ही में शिवसेना, बीजेपी और एनडीए से अलग हो गई है तो वहीं एक ओर बड़े सहयोगी दल ने अपने तेवर दिखना शुरू कर दिए है. इस मामले को लेकर सहयोगी दल का कहना है कि वह एनडीए से अलग हो सकता है. इसके लिए पार्टी ने एनडी को सिर्फ 8 अगस्त का समय सिया है.

जानिए कौन है वो सहयोगी पार्टी

बता दें यह दल मोदी सरकार और भाजपा का सबसे पुराना दल है. ये लगभग चार साल से मोदी सरकार के साथ जुड़ा हुआ है. हम बात करने जा रहें है रामविलास पासवान की जो लोक जनशक्ति पार्टी से है.ये बात खुद राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने कही है.

क्या है पासवान की मांग

बता दें कि दलितों के साथ देने वाली और दलितों की राजनीती करने वाले लोजपा ने मोदी सरकार और एनडीए से अलग होने के लिए दलित लोगों को मुद्दा बनाकर मोदी सरकार पर निशान साधा है. रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने कहा कि 8 अगस्त तक मोदी सरकार एससी\एसटी बिल को एक नए रूप से संसद में पेश करें. ये ही नहीं एनजीटी चेयरमैन एके गोयल को भी हटाने की मांग की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस गोयल ने ही एससी\एसटी एक्ट में संशोधन का फैसला किया था.

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अगर मांग नहीं मानी जाएगी तो लोजपा बीजेपी सरकार के खिलाफ- चिराग पासवान

चिराग पासवान ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी इस मांग को पूरा नहीं किया गया तो वह मोदी सरकार के साथ नही देगी और लोजपा मोदी सरकार के खिलाफ होकर एक अलग पार्टी बनाएगी. माना यह भी जा रहा है कि दलितों के मामले पर 9 अगस्त को भारत बंद करने का ऐलान भी किया गया है और लोजपा भारत बंद का समर्थन करेगी और सरकार के खिलाफ मोर्चा भी खोलेगी.

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