किसान कई बार आपसी सहमती से अपनी जमीन को बदल लेते हैं. इसके कई कारण हो सकते हैं. जैसे- अगर किसी किसान की जमींन अलग अलग जगह है, तो वह हमेशा चाहेगा कि उसकी जमींन एक साथ हो जाए. जिससे लिए वो अपनी जमींन के साथ लगती जमींन को संबंधित किसान से समझौता करके बदल लेते हैं. इससे दोनों किसानों को फायदा होता है. लेकिन इस तरह जमींन बदलने के लिए सरकार की तरफ से कुछ नियम बनाएं जाते हैं. जिनका पालन करना बहुत जरूरी होता है. अगर आप भी इस तरह अपनी जमींन की अदला-बदली करना चाहते हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए बहुत महत्तवपूर्ण है.
अब सरकार की तरफ से नियम बनाया गया है कि अगर कोई अपनी जमींन की अदला-बदली करना चाहता है तो बिना स्टांप शुल्क भूमि की अदला-बदली कर सकता है. लेकिन उसके लिए कुछ दायरा तय किया गया है. 10 फीसदी से अधिक महंगी जमीन की अदला-बदली नहीं हो सकती. इसके साथ ही जिस जमींन को बदला जाना है उसका क्षेत्रफल दूसरी जमींन से सवा गुना से अधिक नहीं होना चाहिएं.
उप जिलाधिकारी न्यायालय में दोनों पक्ष पहले प्रार्थनापत्र फिर शपथपत्र के रूप में सहमति पत्र देंगे. एसडीएम सर्किल रेट के हिसाब से भूमि की कीमत देखेंगे और उसके अनुसार अदला-बदली को मंजूरी देंगे. मंजूरी के बाद खतौनी और अन्य राजस्व अभिलेखों में भूमि का स्वामित्व दर्ज हो जाएगा. नई राजस्व संहिता में यह सुविधा मिलने से काश्तकारों को परेशानियों से निजात मिलेगी.
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एसडीएम लेखपाल और कानूनगो से मौका मुआयना कराएंगे. इसमें यह पता किया जाएगा कि यह अदला-बदली किसी दबाव में तो नहीं हो रही है. नियमों का पालन हो रहा है या नहीं. एक काश्तकार की भूमि समतल और दूसरी बंजर तो नहीं है. जांच रिपोर्ट से संतुष्ट होने के बाद एसडीएम अदला-बदली को मंजूरी देंगे.










