पेट्रोल-डीजल पर 12 जून से लागू अस्थायी पाबंदियाँ 1 जुलाई से खत्म, आपूर्ति स्थिति सामान्य होने पर केंद्र का निर्णय
पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट के बाद ईंधन बाज़ार में उत्पन्न अव्यवस्था से निपटने के लिए लगाई गई अस्थायी पाबंदियों को अब हटाने का वक्त आ गया है। केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि पेट्रोल और हाई स्पीड
पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट के बाद ईंधन बाज़ार में उत्पन्न अव्यवस्था से निपटने के लिए लगाई गई अस्थायी पाबंदियों को अब हटाने का वक्त आ गया है। केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) की खुदरा बिक्री पर लागू सभी अस्थायी नियामक उपाय 1 जुलाई 2026 से समाप्त कर दिए जाएंगे।
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 29 जून को यह घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के खुदरा बिक्री केंद्रों पर 12 जून 2026 को जारी आदेश अगले महीने की पहली तारीख से निरस्त माना जाएगा।
पाबंदियाँ क्यों लगाई गई थीं?
दरअसल, पश्चिम एशिया में छिड़े भू-राजनीतिक संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतें तेज़ी से चढ़ गई थीं। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने देश में खुदरा पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखीं — आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ न डालने की नीयत से।
लेकिन इसी स्थिरता का एक उलटा असर यह हुआ कि खुदरा और थोक कीमतों के बीच का अंतर बढ़ता गया। इसका फ़ायदा उठाते हुए कई औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ता निर्धारित उपभोक्ता पंपों के बजाय आम पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदने लगे। नतीजतन देश के विभिन्न हिस्सों में जमाखोरी, हेराफेरी और कालाबाज़ारी की शिकायतें सामने आने लगीं, जिससे आम उपभोक्ताओं को ईंधन की सुचारु उपलब्धता प्रभावित होने लगी।
12 जून को क्या नियम लागू किए गए थे?
इन्हीं हालात को काबू में करने के लिए सरकार ने 12 जून 2026 को दो अहम अस्थायी कदम उठाए थे:
पहला — खुदरा पेट्रोल पंपों पर प्रति ग्राहक या वाहन प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर हाई स्पीड डीजल देने की सीमा तय की गई।
दूसरा — औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं को निर्देशित किया गया कि वे ईंधन की ख़रीद खुदरा पंपों से नहीं, बल्कि उनके लिए निर्धारित उपभोक्ता पंपों से ही करें।
अब पाबंदी हटाने की वजह?
मंत्रालय का कहना है कि इन उपायों ने अपना उद्देश्य पूरा कर लिया — देशभर में खुदरा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हुई और ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखी जा सकी। अब पेट्रोलियम उत्पादों की मौजूदा आपूर्ति स्थिति की समीक्षा के बाद सरकार इस निष्कर्ष पर पहुँची है कि ये अस्थायी प्रतिबंध अब ज़रूरी नहीं रहे। इन पाबंदियों को वापस लेना आपूर्ति व्यवस्था के सामान्य होने का संकेत है।
इनपुट: IANS



