बुधवार, 22 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भारत की ऊर्जा क्षमता में भारी उछाल, नवीकरणीय स्रोतों ने पकड़ी रफ़्तार, सरकारी आंकड़ों में भी आई तेज़ी

भारत की ऊर्जा खपत और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (TPES) वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर…

भारत की ऊर्जा क्षमता में भारी उछाल, नवीकरणीय स्रोतों ने पकड़ी रफ़्तार, सरकारी आंकड़ों में भी आई तेज़ी
(फोटो: IANS)

भारत की ऊर्जा खपत और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (TPES) वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 39,055 पेटाजूल हो गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष (2023-24) के 37,936 पेटाजूल की तुलना में एक महत्वपूर्ण उछाल दर्शाता है।

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यह जानकारी केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने सदन को दी। उन्होंने बताया कि ऊर्जा की एक इकाई 'पेटाजूल' लगभग 278 गीगावाट-घंटे के बराबर होती है, जो इसकी विशालता को दर्शाता है।

नवीकरणीय ऊर्जा में दोगुनी से ज़्यादा वृद्धि का अनुमान

ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी छलांग नवीकरणीय (Renewable) स्रोतों में देखने को मिली है। मंत्री ने बताया कि मार्च 2025 तक देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़कर 47,04,043 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। यह आंकड़ा 31 मार्च, 2024 को दर्ज 21,09,655 मेगावाट क्षमता से दोगुने से भी ज़्यादा है, जो स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़े कदम का संकेत है।

आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया हुई आधुनिक और तेज़

राव इंद्रजीत सिंह ने इस दौरान सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) द्वारा डेटा संग्रह और प्रकाशन में किए गए सुधारों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यू (CAPI) और ई-सिग्मा जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाए हैं, जिससे सर्वेक्षण के आंकड़े अब तेज़ी से और ज़्यादा सटीकता के साथ जुटाए जा रहे हैं।

इन नई तकनीकों में रियल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट और बहुभाषी इंटरफेस जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। इन सुधारों का सीधा असर रिपोर्ट जारी करने की गति पर पड़ा है। जहाँ पहले सर्वेक्षण रिपोर्ट आने में 8-9 महीने लगते थे, वहीं अब यह समय घटकर 45 से 90 दिन रह गया है। मासिक रिपोर्टें अब 15-30 दिनों के भीतर उपलब्ध हो रही हैं।

जीडीपी और महंगाई के बेस ईयर में भी बदलाव

मंत्री ने यह भी बताया कि अर्थव्यवस्था की बदलती तस्वीर को बेहतर ढंग से दर्शाने के लिए प्रमुख आर्थिक संकेतकों के आधार वर्ष (Base Year) में संशोधन किया गया है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। इसी तरह, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का आधार वर्ष अब 2012=100 की जगह 2024=100 होगा।

इनपुट: IANS

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