शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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टाटा संस में चेयरमैन की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद, नोएल टाटा ने बोर्ड से मांगे बैठक के वीडियो और मिनट्स

टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विवाद गहराता जा रहा है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने अब टाटा संस के बोर्ड को एक पत्र लिखकर सितंबर में हुई बैठक के मिनट्स और…

टाटा संस में चेयरमैन की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद, नोएल टाटा ने बोर्ड से मांगे बैठक के वीडियो और मिनट्स
(फोटो: IANS)

टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विवाद गहराता जा रहा है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने अब टाटा संस के बोर्ड को एक पत्र लिखकर सितंबर में हुई बैठक के मिनट्स और वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

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मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि नोएल टाटा ने 30 सितंबर को भेजे एक ईमेल में कहा कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विषय बैठक के एजेंडा में शामिल ही नहीं था। उनके मुताबिक, इसे 'एनआरसी (नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी) की तरफ से जानकारी' वाले हिस्से के तहत उठाया गया था। इससे पहले भी वह 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग में इस तरह का कोई प्रस्ताव पारित होने से इनकार कर चुके हैं।

कानूनी राय पर भी उठाए सवाल

नोएल टाटा ने अपने पत्र में न केवल बैठक के वीडियो और मिनट्स मांगे हैं, बल्कि बाद में ली गई कानूनी राय और उसे मांगने के आधार पर भी सवाल खड़े किए हैं। गौरतलब है कि टाटा संस ने चंद्रशेखरन को अगले पांच साल का कार्यकाल देने के अपने फैसले को सही ठहराने के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. एन. श्रीकृष्ण की कानूनी राय का हवाला दिया था। इन दोनों पूर्व जजों ने प्रस्ताव को 'सही तरीके से पारित' बताया था।

विवाद की जड़ क्या है?

इस पूरे विवाद के केंद्र में टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के नियम हैं, खासकर नॉमिनी डायरेक्टरों के वोट और चेयरमैन के 'कास्टिंग वोट' (निर्णायक वोट) से जुड़े प्रावधान। ग्रुप की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर टाटा ट्रस्ट्स ने इस प्रस्ताव को "गैर-कानूनी" और "कानूनी रूप से अमान्य" करार दिया है। ट्रस्ट्स का कहना है कि नियुक्ति के लिए उसके दोनों नॉमिनी डायरेक्टरों का समर्थन जरूरी था और उसने अपने पक्ष में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की राय का हवाला दिया है।

जिस बैठक में यह प्रस्ताव लाया गया, उसमें नोएल टाटा ने, जो टाटा संस बोर्ड में ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टर भी हैं, इसके खिलाफ वोट दिया था। वहीं, ट्रस्ट के दूसरे नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने इसका समर्थन किया। इस दौरान एन. चंद्रशेखरन खुद इस प्रक्रिया से अलग रहे और स्वतंत्र निदेशक हरीश मनवानी ने चर्चा की अध्यक्षता की। अंततः प्रस्ताव चेयरमैन के 'कास्टिंग वोट' के जरिए पारित किया गया।

इनपुट: IANS

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