हरियाणा में गहराया बिजली संकट: कांग्रेस ने निजीकरण पर उठाए सवाल, टेंडर रद्द करने की मांग
हरियाणा में जारी बिजली और पानी के संकट को लेकर कांग्रेस ने राज्य की नायब सिंह सैनी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को सरकार पर आरोप लगाया कि वह…
हरियाणा में जारी बिजली और पानी के संकट को लेकर कांग्रेस ने राज्य की नायब सिंह सैनी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को सरकार पर आरोप लगाया कि वह बिजली वितरण व्यवस्था को एक निजी कंपनी को सौंपने की कोशिश कर रही है और इस प्रक्रिया के लिए जारी किसी भी टेंडर को तत्काल रद्द करने की मांग की है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरजेवाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि बिजली-पानी के गंभीर संकट से आम लोगों के घर, कारोबार और उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "लोगों के इन्वर्टर जवाब दे रहे हैं। कारोबार और उद्योग बर्बादी की कगार पर हैं। पानी और दूध जैसी बुनियादी जरूरतों की कमी से परेशान लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।"
सरकार की मंशा पर सवाल
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के रुख पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार "अज्ञात लाभ" के लिए बिजली वितरण का निजीकरण कर रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर राज्य सरकार पूरी व्यवस्था एक ही निजी कंपनी को क्यों सौंपना चाहती है और इस कदम के पीछे की वजह क्या है। सुरजेवाला ने यह भी आरोप लगाया कि गुरुग्राम और नूंह में इस प्रक्रिया को इसलिए आगे बढ़ाया जा रहा है, क्योंकि इन क्षेत्रों में मुनाफे की अधिक संभावनाएं हैं।
नियामक आयोग की भूमिका
रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार नियामक प्राधिकरणों के फैसलों की आड़ में अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उन्होंने कहा, "क्या एचईआरसी ने बिजली वितरण व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपने का आदेश दिया है? सभी नियुक्तियां आपने की हैं और आयोग के सदस्य भी भाजपा से जुड़े हैं... आपने ही बिजली वितरण व्यवस्था निजी कंपनियों को सौंपने के आदेश जारी किए हैं।"
हस्तक्षेप की मांग और चेतावनी
सुरजेवाला ने सरकार के इस दावे को भी चुनौती दी कि वह निजीकरण के खिलाफ है। उन्होंने पूछा कि अगर ऐसा है तो सरकार ने अब तक हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। उन्होंने बिजली अधिनियम की धारा 108 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार के पास इस मामले में दखल देने का अधिकार है। सुरजेवाला ने चेतावनी देते हुए कहा, "यदि राज्य के घरों में अंधेरा छाता है... तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नायब सैनी और उनकी सरकार की होगी।" उन्होंने मांग की कि सरकार को तुरंत बिजली कर्मचारी यूनियनों से बात कर निजी कंपनी को दिया गया टेंडर रद्द करना चाहिए।
इनपुट: IANS



