बस्तर दशहरा: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की 'मुरिया दरबार' में ऐतिहासिक भागीदारी, छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का दिन
छत्तीसगढ़ के लिए गुरुवार का दिन एक ऐतिहासिक अवसर लेकर आया, जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के एक महत्वपूर्ण अंग 'मुरिया दरबार' में शामिल हुईं। यह संभवतः पहली बार है जब…
छत्तीसगढ़ के लिए गुरुवार का दिन एक ऐतिहासिक अवसर लेकर आया, जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के एक महत्वपूर्ण अंग 'मुरिया दरबार' में शामिल हुईं। यह संभवतः पहली बार है जब भारत के किसी राष्ट्रपति ने इस पारंपरिक आयोजन में हिस्सा लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति मुर्मु इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रायपुर से जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा, "आज छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। बस्तर में दुनिया का सबसे लंबा दशहरा उत्सव मनाया जाता है, जो 75 दिनों तक चलता है और इसमें 'मुरिया दरबार' भी शामिल है।" उन्होंने आगे कहा, "शायद पहली बार, भारत की राष्ट्रपति 'मुरिया दरबार' में शामिल हो रही हैं। छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से, हम उनका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन करते हैं।" राष्ट्रपति का लाला बाग में एक सभा को संबोधित करने का भी कार्यक्रम है।
आदिवासी विकास और राजनीति
इस मौके पर मुख्यमंत्री साय ने आदिवासी समुदायों के विकास को लेकर अपनी सरकार की प्रतिबद्धता जताई और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी ने लगातार आदिवासी समुदायों का इस्तेमाल वोट बैंक के रूप में किया, लेकिन आज आदिवासी समुदाय इस पार्टी से दूर हो गए हैं।" सीएम ने दावा किया कि 'डबल इंजन' सरकार बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद को खत्म करने में सफल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने आदिवासियों के विकास के लिए अलग 'जनजातीय कार्य मंत्रालय' बनाया है और राज्य में भी कई प्राधिकरण गठित किए गए हैं। साय ने कांग्रेस से सवाल किया, "कांग्रेस को बताना चाहिए कि उन्होंने अपने शासनकाल में जनजातीय समाज के लिए क्या किया है?"
राष्ट्रपति का पिछला कार्यक्रम और संबोधन
इससे पहले गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में 'सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन' कार्यक्रम को संबोधित किया था। नुआखाई के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने और अपनी सफलता को समाज एवं राष्ट्र की सेवा से जोड़ने का आग्रह किया था। राष्ट्रपति ने नुआखाई की शुभकामनाएं देते हुए कहा था कि यह सिर्फ एक सांस्कृतिक समारोह नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव का उत्सव है।
इनपुट: IANS



