स्विगी के शेयर 52-हफ्ते के निचले स्तर पर, जानिए तिमाही नतीजों का क्या रहा असर
फूड और ग्रोसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी के शेयरों में शुक्रवार को भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते शेयर 17 प्रतिशत तक लुढ़ककर अपने 52-सप्ताह के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट की मुख्य…
फूड और ग्रोसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी के शेयरों में शुक्रवार को भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते शेयर 17 प्रतिशत तक लुढ़ककर अपने 52-सप्ताह के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट की मुख्य वजह कंपनी द्वारा जारी किए गए सितंबर तिमाही के कमजोर नतीजे हैं, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शुक्रवार को दोपहर 2 बजे तक स्विगी का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 12.94% की गिरावट के साथ 183.75 रुपए पर कारोबार कर रहा था। दिन के कारोबार के दौरान यह 174.95 रुपए के निचले स्तर तक गया, जबकि इसका उच्चतम स्तर 206 रुपए रहा। विश्लेषकों का मानना है कि यह तेज बिकवाली कंपनी के मुख्य कारोबारों—फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स—के उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन और बढ़ते कॉम्पिटिशन को लेकर बाजार की आशंकाओं को दर्शाती है।
तिमाही घाटे का गणित
वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में स्विगी ने 922 करोड़ रुपए का समेकित शुद्ध घाटा (consolidated net loss) दर्ज किया है। हालांकि यह पिछले साल की समान अवधि के 1,092 करोड़ रुपए के घाटे से 15.6% कम है, लेकिन जून तिमाही के 791 करोड़ रुपए के घाटे की तुलना में यह बढ़ गया है। इसके बावजूद, कंपनी के लिए एक सकारात्मक पहलू भी है। परिचालन से होने वाली आय सालाना आधार पर 36% बढ़कर 7,571 करोड़ रुपए हो गई है।
इंस्टामार्ट बना चिंता का सबब
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय उसका क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'इंस्टामार्ट' बना हुआ है। इसका एडजस्टेड एबिटडा घाटा बढ़कर 895 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछली तिमाही में 778 करोड़ और एक साल पहले 849 करोड़ रुपए था। इंस्टामार्ट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) सालाना 31% बढ़कर 9,230 करोड़ रुपए हो गया, लेकिन यह वृद्धि ग्राहकों को दिए गए इंसेंटिव और बढ़ी हुई लागत की वजह से आई, जिससे कंपनी का मार्जिन प्रभावित हुआ।
ग्लोबल ब्रोकरेज ने घटाया टारगेट
कमजोर नतीजों के बाद कई प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों ने स्विगी के शेयर के लिए अपने टारगेट प्राइस घटा दिए हैं। गोल्डमैन सैश, एचएसबीसी, सीएलएसए, बर्नस्टीन, जेपी मॉर्गन और सिटी जैसे ग्लोबल ब्रोकरेज ने स्टॉक पर अपना नजरिया बदला है। जेफरीज के मुताबिक, इंस्टामार्ट का बढ़ता घाटा एक बड़ी समस्या है और मौजूदा शेयर की कीमत में तो कंपनी के फूड डिलीवरी बिजनेस और कैश की वैल्यू भी पूरी तरह नहीं दिख रही है।
इनपुट: IANS



