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मनोज जोशी का कॉलम: वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले का कोई कानूनी आधार नहीं है

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मनोज जोशी का कॉलम:  वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले का कोई कानूनी आधार नहीं है

मनोज जोशी का कॉलम: वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले का कोई कानूनी आधार नहीं है

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  • Manoj Joshi’s Column: There Is No Legal Basis For The US Attack On Venezuela

4 घंटे पहले

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मनोज जोशी विदेशी मामलों के जानकार

वेनेजुएला में अमेरिका ने जो किया, उसकी कानूनी वैधता को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। अमेरिका ने इस कार्रवाई को मादुरो की गिरफ्तारी के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सैन्य समर्थन देने की तरह बताया है। मादुरो पर 2020 में नार्को-आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में अभियोग लगाया गया था। लेकिन मजे की बात है कि मादुरो की पत्नी सेलिया फ्लोरेस को भी गिरफ्तार कर लिया गया है और संशोधित अभियोग का हिस्सा बना दिया गया है। जबकि 2020 के मूल अभियोग में उनका नाम शामिल नहीं था।

अधिकांश अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों, यूएन और कई देशों की सरकारों का कहना है कि अमेरिका की ये कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। उनकी दलीलों की बुनियाद में राज्यसत्ता की सम्प्रभुता है। जबकि ट्रम्प प्रशासन इस आरोप का बचाव एक कानून प्रवर्तन कार्रवाई के रूप में करता है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी कानून के तहत नार्को-आतंकवादी घोषित एक व्यक्ति को मुकदमे के लिए कठघरे में लाना है।

प्रचलित अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सम्प्रभु देश के राष्ट्राध्यक्षों को विदेशी अदालतों में इम्युनिटी प्राप्त होती है। स्वयं अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 1812 में इस विषय पर दिए एक निर्णय में इसे मान्यता दी थी। लेकिन ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि मादुरो वैध राष्ट्रपति नहीं हैं। तथ्य तो यही है कि उन्होंने बार-बार चुनाव जीते हैं और वे अपने देश की राष्ट्रीय निर्वाचन परिषद द्वारा निर्वाचित घोषित किए गए हैं। इसलिए चुनावों में धांधली का दावा भी किस अधिकार के बूते किया जा सकता है?

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दूसरा, और अधिक गंभीर पहलू वेनेजुएला पर कब्जा करके उसके तेल संसाधनों का नियंत्रण अपने हाथों में लेने की अमेरिकी योजना है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है। ट्रम्प ने संकेत दिया है कि उन्होंने वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अमेरिकी निर्देशों का पालन करने के लिए मना लिया है। हालांकि इसके बाद रोड्रिगेज ने अमेरिकी कार्रवाइयों की निंदा की।

ट्रम्प यह भी कह चुके हैं कि अमेरिका वेनेजुएला में एक ऑकुपेशन-फोर्स के साथ ही तेल विशेषज्ञों को भी भेज सकता है, ताकि उसके तेल उद्योग को अपने नियंत्रण में लिया जा सके। लेकिन किसी देश पर कब्जा करने और उसके संसाधन को वैश्विक बाजार में बेचने के लिए न तो अमेरिकी कानून और न ही अंतरराष्ट्रीय कानून ट्रम्प को कोई कानूनी इजाजत देते हैं।

यूएन चार्टर का अनुच्छेद 2(4) आत्मरक्षा के औचित्य या यूएन की स्पष्ट अनुमति के बिना किसी अन्य राज्य की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग करने या इसकी धमकी देने पर भी प्रतिबंध लगाता है। इन अर्थों में वेनेजुएला पर किया गया हमला यूएन चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन हैं।

नार्को-तस्करी का आरोप भी केवल इन अवैध अमेरिकी कार्रवाइयों को जायज ठहराने के लिए ही लगाया गया है। वास्तव में, अमेरिका की आधिकारिक नेशनल ड्रग थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट 2025 में मादुरो के बारे में बहुत कम या लगभग कुछ भी नहीं कहा गया था। इसके विपरीत, इसमें मैक्सिको, कोलंबिया और कुछ अन्य लैटिन अमेरिकी देशों को मादक पदार्थों के प्रमुख स्रोत के रूप में चिह्नित किया गया था।

अमेरिकी कानून के तहत भी इस कार्रवाई की वैधता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। युद्ध की घोषणा करने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है, लेकिन ट्रम्प प्रशासन इसे महज एक कानून प्रवर्तन कार्रवाई बता रहा है। जबकि ऐसी कार्रवाइयों में पूरे नौसैनिक बेड़े, 150 विमानों और हजारों कर्मियों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। ट्रम्प तो यह भी संकेत दे चुके हैं कि यदि पहली कार्रवाई विफल होती तो अमेरिका दूसरा और बड़ा हमला करने जा रहा था।

यह तो साफ है कि ट्रम्प की नजर वेनेजुएला के 350 अरब बैरल के तेल भंडार पर है। पिछले लगभग बीस वर्षों में, कुप्रबंधन और प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला का उत्पादन प्रतिदिन 32 लाख बैरल (बीपीडी) के उच्च स्तर से गिरकर मात्र 10 लाख बीपीडी रह गया है। अब ट्रम्प के अनुसार अमेरिका उसके तेल उद्योग को अपने नियंत्रण में लेगा, उसका पुनर्गठन करेगा और तेल का निर्यात करेगा।

ट्रम्प दावा कर रहे हैं कि इससे मिलने वाला धन न केवल वेनेजुएला के लोगों के भले के लिए इस्तेमाल होगा, बल्कि अमेरिका को हुए नुकसान की भरपाई भी करेगा। लेकिन हकीकत यह है कि अगर अमेरिका वास्तव में ही वेनेजुएला के तेल उद्योग का संचालन शुरू कर देता है, तो वहां के लोगों को अपने तेल से मुनाफा मिलने में अभी बहुत समय लगने वाला है।

19वीं-20वीं सदी में अमेरिका ने मैक्सिको, क्यूबा, निकारागुआ, होंडुरास, पनामा पर हमले किए थे। चिली, इक्वाडोर, ग्वाटेमाला, पेरू, ब्राजील में तख्तापलट भी कराए। लैटिन अमेरिका में अमेरिकी दखल का पुराना अतीत है। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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