कनाडा में मारे गए कारोबारी की कहानी: लुधियाना में पढ़े, दुबई में क्रूज शिप में काम किया; आखिरी शब्द- इस मिट्टी का कर्जदार रहूंगा – Khanna News h3>
कारोबारी सहसी का घर, शोक जताने पहुंचे लोग और जानकारी देते हुए रिश्तेदार। इनसेट में दर्शन सिंह सहसी की फोटो।
कनाडा के एबॉट्सफोर्ड में पंजाब के लुधियाना के कारोबारी दर्शन सिंह सहसी (68) की हत्या कर दी गई। हमलावरों ने उन्हें कार में गोलियां मारीं। इसके बाद से लुधियाना के दरोहा में उनके पैतृक गांव राजगढ़ में मातम छा गया है। गांव के युवा से लेकर बुजुर्ग तक सभी उ
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दर्शन सिंह सहसी इसी साल फरवरी में गांव आए थे और एक महीना रहकर गए। गांव में उन्होंने आलीशान घर बनाया है। एक महीने तक गांव के छोटे-बड़े सभी लोग उनको मिलने आते थे। यही नहीं वह खुद भी लोगों से मिलने के लिए उनके घरों में चले जाते थे।
गांव से जब आखिरी बार जा रहे थे तो उस समय उन्होंने कहा था कि आज जो भी इस मिट्टी की वजह से हूं। गांव की इस मिट्टी का हमेशा कर्जदार रहूंगा। ग्रामीणों के साथ बोलकर गए थे कि अब हर साल जनवरी फरवरी में एक महीने के लिए गांव आया करूंगा। राजगढ़ में उनके पुराने घर के बाहर मोमबत्तियां जलाकर ग्रामीणों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
दर्शन सिंह के एक भाई की 1979 में सड़क हादसे में मौत हो गई थी, जबकि दूसरा भाई कनाडा में उनके साथ ही रहता है। साहसी कैनम इंटरनेशनल कंपनी के अध्यक्ष थे, जो विश्व की सबसे बड़ी कपड़ों की रिसाइकलिंग कंपनियों में से एक मानी जाती है।
सीसीटीवी कैमरे में हमलावर गाड़ी में सवार कारोबारी को गोलियां मारता दिख रहा है।
दर्शन सिंह सहसी का गांव राजगढ़ से कनाडा पहुंचने का सफर पढ़िए…
- दोराहा के कॉलेज से की ग्रेजुएशन: दर्शन सिंह सहसी का जन्म 1956 में राजगढ़ गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी प्राइमरी स्कूल में हुई। उसके बाद 12 वीं तक की शिक्षा भी सरकारी स्कूल से ही ली। दोराहा के कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद वो काम काज के लिए दुबई चले गए थे।
- दुबई गए और क्रूज शिप में किया काम: ग्रामीण बताते हैं कि दर्शन सिंह सहसी करीब 35 साल पहले कामकाज की खोज में दुबई गए। दुबई में क्रूज शिप में काम किया। क्रूज शिप में काम करते हुए उन्होंने इस कारोबार की बारीकियां समझीं। कुछ साल तक यहां काम किया।
- कनाडा में पहले उनकी बहनें गई: राजगढ़ के बुजुर्ग बताते हैं कि दर्शन सिंह सहसी के पिता ने पहले अपनी बेटियों को कनाडा भेजा। बेटियों ने फिर पिता को बुलाया। पिता की पीआर हुई तो उन्होंने साहसी को वहीं बुला दिया। उस समय दर्शन सिंह सहसी दुबई में काम कर रहे थे। पिता ने उन्हें भी दुबई से कनाडा बुला दिया।
- कनाडा में जाकर शुरू किया खुद का कारोबार: उनके एक रिश्तेदार बताते हैं कि दर्शन सिंह ने कनाडा में पहले छोटा-मोटा काम किया। उसके बाद कपड़ों की रिसाइक्लिंग का काम शुरू किया। धीरे-धीरे काम बढ़ता गया और वो कनाडा के बड़े कारोबारी बन गए। वर्तमान में दुनिया के कई देशों में उनका कारोबार चल रहा है। करीब 25-30 साल से वो वहां अपना कारोबार चला रहे थे।
लुधियाना के गांव राजगढ़ में साहसी का घर, जहां वह फरवरी महीने में आए थे।
- भट्ठे वालों के नाम से मशहूर हो गया था परिवार: गांव में सहसी के परिवार की काफी जमीन है। परिवार ने ईंट का भट्ठा बनाया था। भट्ठे पर लोग काम करने आते थे। गांव में वो भट्ठे वाले के नाम से परिवार मशहूर हो गया था। विदेश जाने के बाद भी वो ईंट का भट्ठा चलाते रहे। कारोबार ज्यादा होने की वजह से ईंट के भट्ठे की तरफ ध्यान नहीं दे पाए। 8 साल पहले उन्होंने भट्ठा बंद किया।
- भट्ठे वाली जगह बनाया कैनम कंपनी का दफ्तर: दर्शन सिंह सहसी का कारोबार कनाडा में था लेकिन उन्होंने अपनी कंपनी कैनम का दफ्तर गांव में भी खोला है। जहां पर ईंट का भट्टा था, वहां पर उन्होंने कैनम कंपनी का दफ्तर खोला हुआ है। लोगों का कहना हे कि भट्ठे वाले परिवार ने इसी भट्ठे से अपना कारोबार आगे बढ़ाया था। इसलिए सहमी इस भट्ठे को लक्की मानते थे। जब भट्ठा बंद हुआ तो उन्होंने यहां पर अपना दफ्तर बना दिया। साहसी की पत्नी और 2 बेटे भी कनाडा में रहते हैं।
दर्शन सिंह सहसी पहले दुबई फिर वहां से कनाडा गए थे।
अब पढ़िए कंपनी मैनेजर और लोगों ने क्या कहा…
- बॉस नहीं, पिता जैसे इंसान थे साहसी: कंपनी के भारतीय मैनेजर नितिन ने भावुक होते हुए कहा- वो हमारे बॉस नहीं, पिता से बढ़कर थे। कभी एहसास ही नहीं हुआ कि हम इतने बड़े उद्योगपति से बात कर रहे हैं। वे हर कर्मचारी से व्यक्तिगत लगाव रखते थे। जब भी कारोबार के संबंध में बात करते थे तो गांव के बारे में जरूर पूछते थे।
- हत्या वाले दिन आधा घंटा फोन पर बात की: नितिन ने कहा कि जिस दिन उनकी हत्या हुई उससे पहले उन्होंने करीब आधे घंटे तक उनके साथ बात की। यह बात कारोबार से संबंधित थी। लेकिन कुछ देर बाद जब सूचना मिली कि उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई है, तो किसी को विश्वास ही नहीं हुआ।
कंपनी के मैनेजर नितिन ने कहा कि बॉस की हत्या की सूचना मिली तो विश्वास नहीं हुआ।
- कभी अहंकार नहीं किया, सबको जोड़ा रखा: गांव राजगढ़ के बुजुर्ग गुरबख्श सिंह बताते हैं कि अरबपति बनने के बाद भी उन्होंने कभी घमंड नहीं किया। परिवार, रिश्तेदार, जान-पहचान वाले सबको धागे में पिरोए रखा। कई रिश्तेदारों को कनाडा में सेट किया, भतीजों को संभाला।
- अपने वर्करों को गुजरात में दिए 700 घर: उन्होंने बताया कि दर्शन सिंह की कंपनी के गुजरात के कांडला पोर्ट पर करीब 700 लोग काम करते हैं। मजदूरों के लिए उन्होंने वहां घर बनवाए। बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया। गरीब लड़कियों की शादियां कराईं। बीमारों को इलाज के लिए पैसे दिए। वो पैसा नहीं, इंसानियत कमाते थे।
- फरवरी में आए थे गांव, आखिरी बार सबको मिलकर गए: गांववालों के अनुसार दर्शन सिंह इसी साल फरवरी में गांव राजगढ़ आए थे। लगभग एक महीना गांव में रहे। जो भी उनसे मिलता, खाली हाथ नहीं लौटता था। वे कहते थे, मैं आज जो हूं, वह इस मिट्टी की वजह से हूं।
- साहब जैसे लोग हर पीढ़ी में एक दो ही होते हैं: गांव के एक युवक का कहना है कि दर्शन जैसे लोग हर पीढ़ी में एक-दो ही होते हैं। वो हमें सिखा गए कि अमीरी दिल में नहीं होनी चाहिए। जिस मिट्टी से निकले, उसे कभी भूलना नहीं चाहिए।
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