झारखंड: निलंबित IAS विनय चौबे को जमीन घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 13 महीने बाद होगी रिहाई
झारखंड के चर्चित हजारीबाग जमीन घोटाले में आरोपी निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को न्यायमूर्ति…
झारखंड के चर्चित हजारीबाग जमीन घोटाले में आरोपी निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह आदेश पारित किया, जिससे उनके करीब साढ़े तेरह महीने बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
विनय चौबे नवंबर 2025 से इस मामले में जेल में बंद थे। उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मामले के सह-आरोपी विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को पहले ही जमानत मिल चुकी है। वहीं, राज्य सरकार ने यह कहते हुए जमानत का विरोध किया कि चौबे एक प्रभावशाली अधिकारी रहे हैं और रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
जमानत की शर्तें और अदालत का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए कुछ कड़ी शर्तें लगाई हैं। विनय चौबे को बिना अनुमति देश छोड़ने, जांच में पूरा सहयोग करने और किसी भी गवाह से संपर्क या उसे प्रभावित करने की कोशिश न करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो राज्य सरकार जमानत रद्द कराने के लिए सक्षम अदालत जा सकती है।
क्या है हजारीबाग जमीन घोटाला?
यह मामला उस समय का है जब विनय चौबे हजारीबाग के उपायुक्त (DC) थे। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, आरोप है कि वनभूमि और खासमहल जमीन के सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर उनकी प्रकृति बदली गई। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह जमीन निजी लोगों को हस्तांतरित कर दी गई। एसीबी ने इस मामले में कांड संख्या 11/2025 दर्ज किया है, जिसमें विनय चौबे सहित कुल 73 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
दो मामलों में आरोपी हैं विनय चौबे
गौरतलब है कि विनय चौबे राज्य के शराब घोटाला मामले में भी आरोपी हैं। उन्हें 20 मई 2025 को एसीबी ने गिरफ्तार किया था। शराब घोटाले में आरोपपत्र 92 दिनों के भीतर दाखिल न होने के कारण उन्हें विशेष अदालत से वैधानिक जमानत मिल गई थी, लेकिन हजारीबाग जमीन घोटाले में प्राथमिकी दर्ज होने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो सकी थी। अपने प्रशासनिक कार्यकाल में चौबे उत्पाद विभाग के सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
इनपुट: IANS



