विदेशी निवेशकों ने सितंबर में अब तक भारतीय बाज़ार से ₹14,474 करोड़ निकाले, मध्य पूर्व का तनाव बनी बड़ी वजह
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय शेयर बाज़ार पर साफ दिख रहा है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने इस महीने यानी 1…
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय शेयर बाज़ार पर साफ दिख रहा है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने इस महीने यानी 1 से 12 सितंबर के बीच भारतीय इक्विटी बाज़ार से 14,474 करोड़ रुपए की भारी-भरकम निकासी की है। यह लगातार दो महीने, जुलाई और अगस्त, के सकारात्मक निवेश के बाद आया एक बड़ा उलटफेर है।
लगातार पांच हफ्तों से भारतीय इक्विटी बाज़ार दबाव में है और निफ्टी 50 में गिरावट दर्ज की गई है। बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में तनाव के चलते कच्चे तेल के दाम बढ़ने से महंगाई और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे बाज़ारों में बड़े पैमाने पर बिकवाली देखने को मिली।
घरेलू निवेशकों ने बाज़ार को संभाला
एक तरफ जहाँ विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे थे, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को सहारा दिया। आंकड़ों के अनुसार, DIIs ने पिछले हफ्ते 6,419.46 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की। इस खरीदारी ने विदेशी बिकवाली के प्रभाव को कुछ हद तक कम किया और बाज़ार को और बड़ी गिरावट से बचाने में मदद की। हालांकि, विदेशी निवेशकों का सतर्क रुख और लगातार बिकवाली घरेलू बाज़ार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
प्राइमरी मार्केट में FPI का भरोसा कायम
नकद बाज़ार (equity market) से निकासी के बावजूद, FPIs का भरोसा प्राइमरी मार्केट यानी IPOs में बना हुआ है। सितंबर में अब तक उन्होंने प्राइमरी मार्केट में 1,336 करोड़ रुपए का सकारात्मक निवेश किया है। इसके साथ ही, इस साल प्राइमरी मार्केट में कुल FPI निवेश बढ़कर 47,183 करोड़ रुपए हो गया है।
आगे बाज़ार की दिशा क्या होगी?
जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में FPI निवेश का रुख ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर काफी हद तक निर्भर करेगा। तेल की ऊंची कीमतें और बढ़ती महंगाई का सीधा मतलब मौद्रिक नीति का सख्त होना है, जिससे बॉन्ड यील्ड और बढ़ सकती है। अगले हफ्ते भी वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, भू-राजनीतिक जोखिमों और अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों के कारण भारतीय बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
इनपुट: IANS



