साइबर ठगी: 'डिजिटल अरेस्ट' से जुड़े मामले में एयरटेल का वितरक गिरफ्तार, CBI ने 10 ठिकानों पर की छापेमारी
देशभर में साइबर धोखाधड़ी के 70 से ज्यादा मामलों से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक…
देशभर में साइबर धोखाधड़ी के 70 से ज्यादा मामलों से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार व्यक्ति बिहार के वैशाली जिले में एयरटेल का एरिया डिस्ट्रीब्यूटर है और उस पर फर्जी तरीके से सैकड़ों सिम कार्ड जारी कर साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का आरोप है।
यह कार्रवाई पिछले साल बिहार के सुपौल जिले में सामने आए एक अवैध सिम बॉक्स ऑपरेशन की जांच के सिलसिले में की गई। बिहार सरकार ने बाद में इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया था। जिस घर में यह सिम बॉक्स चलाया जा रहा था, वहां से 1,300 से ज्यादा सिम कार्ड बरामद हुए थे। जांच में पता चला कि यह सिम बॉक्स ऑपरेशन देशभर में साइबर अपराध के कम से कम 73 मामलों से जुड़ा था, जिनमें 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर की गई ठगी भी शामिल है।
जांच में हुआ बड़ा खुलासा
सीबीआई ने जब बरामद 1,300 से अधिक सिम कार्ड के डेटा का विश्लेषण किया, तो जांच बिहार और ओडिशा तक पहुंची। एजेंसी ने पाया कि इनमें से बड़ी संख्या में सिम कार्ड इन्हीं दो राज्यों से जारी किए गए थे। इनमें से 700 से ज्यादा सिम कार्ड अकेले वैशाली जिले के एक ही एयरटेल एरिया डिस्ट्रीब्यूटर ने जारी किए थे।
आरोप है कि इस वितरक ने एक दर्जन से अधिक सिम कार्ड प्वाइंट ऑफ सेल (POS) के क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग कर इन सिम को एक्टिवेट किया था। इस सिलसिले में सीबीआई ने वैशाली (बिहार) और जगतसिंहपुर (ओडिशा) समेत 10 ठिकानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप और सिम कार्ड समेत कई डिजिटल उपकरणों से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है।
ग्राहकों के नाम पर धोखाधड़ी
जांच के दौरान कई ऐसे ग्राहक भी सामने आए जिन्हें पता ही नहीं था कि उनके नाम पर सिम कार्ड जारी किए गए हैं। आरोप है कि वितरक ने भोले-भाले ग्राहकों को निशाना बनाया। जब कोई व्यक्ति वास्तविक जरूरत के लिए सिम कार्ड लेने आता था, तो उसे धोखे से कई बार ई-केवाईसी कराने के लिए राजी कर लिया जाता था और उसके नाम पर अतिरिक्त सिम जारी कर दिए जाते थे। कुछ मामलों में, किसी अन्य काम के लिए पहले से एकत्र किए गए बायोमेट्रिक डेटा का भी दुरुपयोग किया गया।
सीबीआई ने कहा है कि वह धोखाधड़ी, जालसाजी, जबरन वसूली और आईटी एक्ट के तहत पहचान की चोरी जैसे मामलों में जांच कर रही है। एजेंसी ने नागरिकों को 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी किसी भी कानूनी व्यवस्था के न होने की बात दोहराते हुए सतर्क रहने की अपील की है।
इनपुट: IANS



