दिल्ली: अमेरिकी नागरिकों को 'एप्पल सपोर्ट' बनकर ठगने वाले कॉल सेंटर का पर्दाफाश, 7 गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने पश्चिमी दिल्ली के नारायणा औद्योगिक क्षेत्र में चल रहे एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है, जो कथित तौर पर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बना रहा था। समाचार एजेंसी IANS की…
दिल्ली पुलिस ने पश्चिमी दिल्ली के नारायणा औद्योगिक क्षेत्र में चल रहे एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है, जो कथित तौर पर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बना रहा था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग खुद को एप्पल या आईओएस का टेक्निकल सपोर्ट एक्जीक्यूटिव बताकर लोगों से धोखाधड़ी करते थे।
पुलिस को 25 सितंबर को एक गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर पश्चिमी जिले के एंटी-ऑटो थेफ्ट स्क्वाड ने 'वेप्ट्रा' नाम से चल रहे इस कॉल सेंटर पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान, पुलिस ने कॉल सेंटर के कथित मालिक अरुण और उसके साथी सलीम के साथ पांच अन्य कॉलर्स को भी गिरफ्तार किया। ये सभी फर्जी अंग्रेजी नामों का इस्तेमाल कर लैपटॉप और हेडफोन के जरिए अमेरिकी लोगों से बात करते थे।
धोखाधड़ी का तरीका
शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी अमेरिका में टोल-फ्री नंबरों के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। वे पीड़ितों को डराते थे कि उनके डिवाइस या सिस्टम में वायरस, मैलवेयर या पोर्नोग्राफिक कंटेंट पाया गया है और उन्हें तत्काल तकनीकी सहायता की जरूरत है।
इसी बहाने वे पीड़ितों को गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए मनाते थे। जैसे ही पीड़ित गिफ्ट कार्ड खरीद लेता, ये कॉलर्स उनसे उसकी डिटेल्स या कोड हासिल कर लेते और उसे आगे अपने नेटवर्क में भेज देते थे। इस ऑपरेशन के संबंध में 26 सितंबर को नारायणा पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
बरामदगी और जांच
पुलिस ने मौके से पांच लैपटॉप, 12 मोबाइल फोन, दो राउटर, छह हेडफोन, 10 क्रेडिट/डेबिट कार्ड, पांच चेक बुक और एक ऑडी ए3 कार जब्त की है। लैपटॉप की जांच में आईबीम, अल्ट्राव्यूअर और एनीडेस्क जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर और अमेरिकी नंबरों की कॉल हिस्ट्री मिली है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अरुण (29), सलीम (28), निखिल (30), मोंटू सिंह (34), तिरहुचू (26), करण (28) और विशाल (29) के रूप में हुई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने, टोल-फ्री नंबरों के स्रोत का पता लगाने और पैसे के लेन-देन की जांच कर रही है।
इनपुट: IANS



