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18 अगस्त का दिन क्यों महत्वपूर्ण है पश्चिम बंगाल के इतिहास में ?

पश्चिम बंगाल भारत के पूर्व में स्थित एक राज्य है, जिसकी राजधानी कोलकत्ता है.

18 अगस्त का दिन क्यों महत्वपूर्ण है पश्चिम बंगाल के इतिहास में ?

पश्चिम बंगाल भारत के पूर्व में स्थित एक राज्य है, जिसकी राजधानी कोलकत्ता है. पश्चिम बंगाल के इतिहास में 18 अगस्त का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि जब भारत को आजादी मिली तो 15 अगस्त को बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है. ठीक उसी पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में 18 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं. इसके पीछे इतिहास की एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना है.

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पश्चिम बंगाल का स्वंतंत्रता दिवस

भारत का जब विभाजन हुआ तो इसकी सीमा को निर्धारित करने के लिए सीमा आयोग का गठन किया गया. जिसने सीमा निर्धारित करते हुए बहुत बड़ी गलती कर दी तथा वर्तमान पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों को पूर्वी पाकिस्तान यानि की वर्तमान बांग्लादेश में दिखाया. नक्शे में इस तरह की सीमा आयोग की गड़ब़ड़ी का बहुत बड़े स्तर पर पश्चिम बंगाल में विरोध प्रदर्शन हुआ. जिसके बाद सीमा आयोग को अपनी गलती का एहसास हुआ. जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान में मिलाए गए पश्चिम बंगाल के क्षेत्र को वापिस भारत में शामिल कर लिया गया. जिस दिन इन ईलाकों को भारत में शामिल किया गया उस दिन 18 अगस्त का दिन था.

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आजादी

इतिहास की इसी महत्वपूर्ण घटना के बाद पश्चिम बंगाल के कुछ इलाके अपने स्वतंत्रता दिवस को 18 अगस्त को मनाते हैं. उनका मानना है कि देश को 15 अगस्त , 1947 को आजादी मिली. लेकिन असल मायने में उनकों 18 अगस्त , 1947 को ही आजादी मिली जब उनको वापिस भारत में मिलाया गया.

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इसी कारण 18 अगस्त का दिन पश्चिम बंगाल के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है. 18 अगस्त को कुछ इलाकों द्वारा स्वतंत्रता दिवस मनाने के पीछे तर्क दिया जाता है कि यदि तब इस बात पर बवाल ना होता और सीमा आयोग द्वारा अपनी इस भारी गलती को सुधारा नहीं जाता तो उनका इतिहास कुछ और ही होता.

KJ

Kapil Jakhar

कपिल जाखड़ News4Social के कंटेंट राइटर हैं। वे समसामयिक घटनाक्रम, फ़ीचर और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में प्रस्तुत करने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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