सवाल 149: भगवान शिव को बेल पत्र क्यों अर्पित किए जाते हैं ?

bilva leaves
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देवों के देव महादेव को पूजा -अर्चना करते वक़्त बेलपत्र अर्पित किया जाता है। हिन्दू मान्यता में बेलपत्र का महत्व बहुत अधिक होता है। आपने अक्सर देखा होगा की बैल पत्र शिव भगवन को ही चढ़ाया जाता है , आपने कभी सोचा है की शिव भगवन को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है और इसका क्या महत्व है तो आज हम आपको बताने जा रहे है शिव भगवन को बेलपत्र अर्पित करने के पीछे का कारण।

शिव भगवन बहुत भोले माने जाते है। ऐसा भी मन जाता है कि सभी देवों में से शिव भगवन को प्रसन्न करना सरल है, भक्तों के जरा से स्नेह या पूजा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। महाशिवरात्रि पर शिवभक्त भगवान शंकर की अराधना करते हैं. महाशिवरात्रि की पूजा विधि में बेलपत्र का इस्तेमाल किया जाता है। भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय हैं।

शिव से जोड़ी कथा बहुत प्रचलित है की सागर मंथन के समय जब हालाहल नाम का विष निकलने लगा तो भगवान शिव ने विष को अपनी अंजुली में लेकर पी लिया और इसे कंठ में धारण किया। विष के असर से भगवान शिव जी का मस्तिष्क गर्म होने लगा। जिसके बाद देवताओं ने भोले के मस्तिष्क पर जल चढ़ाना शुरू किया। इसी दौरान उन्हें बेलपत्र भी चढ़ाया गया था ताकि शिव जी शांत हो जाए और उनके मस्तिष्क पर ज्यादा प्रभाव न पड़े। यह भी माना जाता है की बेलपत्र बैल पात्र चढाने से शिव भगवन शांत हो गए थे।

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उस समय से भगवन शिव की पूजा -अर्चना करते वक़्त बेलपत्र को चढ़ाया जाना अनिवार्य होगया यह भी मान्यता है अगर बेलपत्र अर्पित किया जाए तो शिव भगवन अपनी भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते है। महाशिवरात्रि अधिकतर फाल्गुन मास में आती है जब ग्रीष्म का मौसम होता है। बेलपत्र या बैल फल का यह भी महत्व होता है कि यह ठंडक पहुंचता है।

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