सवाल 94 – मक्का मदीना में गैर मुस्लिम का जाना क्यों मना हैं?

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सवाल 94 - मक्का मदीना में गैर मुस्लिम का जाना क्यों मना हैं?

मक्का मदीना पूरी दूनिया के मुसलमानों के लिए बहुत ही बड़ा और पाक तीर्थ स्थल है. मक्का में स्थित पवित्र काबा की परिक्रमा करने को हर मुस्लिम समुदाय को लोग खुद को बहुत ही खुशकिस्मत समझते है. यहीं वह स्थल है, जहां पर हज यात्रा संपन्न होती है. दूनिया के कोने-कोने से हर मुस्लिम इस पाक स्थान पर पहुंचते हैं.

इस्लाम का जन्म सऊदी अरब की धरती पर हुआ. इसलिए मक्का मदीना इस देश की धरोहर है. बता दें कि जेता से मक्का मदीना जाने वाले रास्ते पर यह स्पष्ट रुप से लिखा हुआ है कि यहां पर केवल मुसलमान ही जा सकता है, इसके अलावा कोई नहीं जा सकता है. यहां के ज्यादातर साइन बोर्ड अरबी भाषा में लिखा है कि जिसे काफी देशों के लोग नहीं पढ़ पाते हैं. वहीं पहले यहां लिखा जाता था कि यहां काफिरों का प्रवेश वर्जित है. लेकिन अब यह गैर मुसलमान शब्द काम में लिया जाता है.

वहीं इतिहास मक्का मदीना के बारे में यह बया करता है कि यहां पर पहले भगवान शिव का शिवलिंग था. जिसे बाद में मुस्लिम तीर्थ स्थल में बदल दिया गया. लोगों का कहना है कि यहां पर पहले मक्केस्वर महादेव का मंदिर था. वहां काले रंग का एक खंडित शिवलिंग था. ऐसा कहा जाता है कि वहां पर शिवलिंग अभी भी मौजूद है.

वहीं मक्का के लिए प्रसिद्ध इतिहासकार पी. एल. हॉक ने अपनी किताब में लिखा कि वैंकटेश पंडित द्वारा रचित रामावतार चरित में मक्केश्वर महादेव का उल्लेख किया गया है. जोकि रामायण के दूसरे किसी संस्करण में नहीं मिलता. इसमें ऐसा कहा जाता है कि रामावतार चरित के अनुसार शिव रावण को युद्ध में विजय होने के लिए एक शिवलिंग देते हैं. भगवान शिव ने रावण से कहा कि किसी भी कारण इस शिवलिंग को धरती में मत रखना, लेकिन ऐसा माना जाता है कि रावण ने किसी कारण वश शिवलिंग को धरती पर रख देता है. जहां पर आज मक्का का पाक स्थल माना जाता है.

भारतीय संस्कृति में पवित्र गंगा का स्पष्ट उल्लेख जहां शिव के साथ गंगा और चंद्रमा की कल्पना की जाती है. काबा के पास एक पवित्र झरना है. यह इस्लाम की स्थापना से पहले भी इस पानी को पवित्र माना जाता था. जिसे इस्लाम में आबे जम-जम का पवित्र पानी कहा जाता है.

बता दें कि मक्का-मदीना में कोई भी गैर मुस्लिम प्रवेश नहीं कर सकता. क्योंकि यहां प्रवेश करने के लिए एक बुनियादी शर्त है और वो ये है कि जो शख्स पूरे मन से अल्लाह का सच्चे मन से मानता हो जो इस इस्लाम धर्म को मानता हो और यहां पर प्रवेश करने से पहले उसे इस्लाम धर्म को स्वीकर करना पड़ेगा.

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