रेबीज के टीके की खोज किसने की थी और इसका इतिहास ?
वर्तमान समय में हमें कई तरह की स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
वर्तमान समय में हमें कई तरह की स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जिनमें से काफी का वैज्ञानिकों ने इलाज ढूंढ लिया तथा कुछ का इलाज ढूंढने के लिए प्रयासरत है. इनमें से काफी बीमारियां ऐसी भी हैं, जो वर्तमान समय में तो हमें ज्यादा प्रभावित नहीं करती हैं और कुछ ऐसी भी है, जो इतनी खतरनाक है कि इनकी वजह से जान भी जा सकती हैं. लेकिन जब ये पहली बार पहचान में आई तब इनका मानव जाति पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव पड़ा. इसी कारण लोगों के मन में बीमारियों के इतिहास से संबंधित कई तरह के सवाल पैदा होते हैं. इसी तरह का एक सवाल जो आमतौर पर लोगों के मन में आता है कि रेबीज के टीके की खोज किसने की थी और इसका इतिहास ? अगर आपके मन में भी ऐसा ही सवाल है, तो इस पोस्ट में इसी सवाल का जवाब जानते हैं.

रेबिज-
किसी भी बीमारी के इलाज से पहले हमें उसके बारे में अच्छे से जान लेना चाहिएं. रेबीज के टीके के बारे में जानने से पहले हमारे लिए यह जानना आवश्यक है कि रेबिज क्या होता है. इसके साथ ही यह किस तरह से हमारे लिए खतरनाक है. रेबिज एक वायरस होता है. जो हमारे शरीर में हमारे नर्वस सिस्टम को सीधे प्रभावित करता है. इसकी वजह से दिमाक में सूजन आ सकती है. जिससे इंसान कोमा में भी जा सकता है. इसके अलावा उसे पानी से डर लगना शुरू हो जाता है या फिर वह लकवा से भी ग्रस्त हो सकता है. रेबिज के लक्षण काफी दिनों बाद दिखने शुरू होते हैं. इसके लक्षणों की बात करें, तो इसमें सिर दर्द , घबराहट , खाना निगलने में मुश्किल तथा बहुत अधिक लार निकलना इत्यादी हो सकते हैं.

रेबीज के टीके की खोज -
जब किसी को कोई कुत्ता काट लेता है, तो ऐसी स्थिति में जल्दी से जल्दी रेबीज का टीका लगा लेना चाहिएं. इसके लिए एंटी रेबीज वैक्सीन या आलर्क निरोधी वैक्सीन लगाई जाती है. अगर यह वैक्सीन नहीं लगवाई जाती है, तो ऐसी स्थिति में रेबिज रोग होने का खतरा बहुत ही बढ़ जाता है. अगर इस रेबीज के टीके की खोज की बात करें, तो इसकी खोज एक फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पास्चर ने की थी. इसका आविष्कार 1885 में किया गया.
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आमतौर पर यह धारणा होती है कि कुत्तों के काटने पर रेबिज हो सकता है. लेकिन यह धारणा गलत है. कुत्तों के अलावा अन्य जानवरों जैसे बिल्ली , बंदर इत्यादी की वजह से भी रेबिज हो सकता है. जब संक्रमित जानवर की लार का संपर्क मनुष्य के खून से होता है, तब यह वायरस हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है. अगर कोई जानवर काट लेता है, तो उसे तुरंत साफ पानी तथा साबुन से धोना चाहिएं. इसके साथ ही तुरंत टिटनेस का इंजक्शन लगवाना चाहिए.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. News4social इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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